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Muzaffarnagar News: गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए जमीन के भाव से मांगा मुआवजा

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चरथावल। किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने कहा गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए सामूहिक रूप से संबंधित गांवों में किसानों की पंचायत नहीं हुई है। सु्प्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार भूमि अधिग्रहण से पहले 70 फीसदी किसानों की सहमति आवश्यक है।
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एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का सर्किल रेट कम होने के कारण किसानों में नाराजगी जताई। वक्ताओं ने मौजूदा भाव के अनुसार किसानों चार गुणा मुआवजा दिलाने की मांग उठाई।
रोनी हरजीपुर पंचायत में किसान नेता ठाकुर पूरण सिंह ने कहा कि वर्तमान जमीन के भाव के अनुसार ही भूमि का सर्किल रेट तय किया जाए। अरसे से फिलहाल मंगनपुर और रोनी हरजीपुर में खेती की जमीन का सर्किल 3.60 लाख रुपये प्रति बीघा है। लेकिन बाजार भाव चार गुणा ज्यादा है। आबादी में आने वाली जमीन का भाव 60 लाख रूपये बीघा तक है।
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उन्होंने कहा हाईवे से विपरीत रेलवे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि को मुआवजे के अलग एक परिवार को पांच लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। चूंकि किसान प्रभावित जमीन में कोई कार्य नहीं कर सकता है। यह प्रावधान छोटी और बड़ी जोत वाले हर किसानों के लिए किया गया है। इसके विपरीत एक्सप्रेसवे में कुछ स्थानों पर सरकार रेस्ट एरिया खोलकर पूंजीपतियों के ब्रांडेड स्टॉलों को लाभ पहुंचाती है। इसमें किसान कोई कार्य नहीं कर पाता और जमीन देने वाले बेरोजगार होते जाते हैं।
किसानों से कानून के मुताबिक जमीन के भाव को लेकर आर्बिटेशन में जाने का निर्णय लिया। कहा कि कॉरिडोर की प्रस्तावित ड्राइंग देखने के बाद क्षेत्र में माकूल स्थान पर कट दिलवाने की मांग की जाएगी।
बिल्लू राणा की अध्यक्षता और रितिक राणा के संचालन में बबली राणा, मनोज राणा, नरेंद्र राणा, पूर्व प्रधान सुबोध पुंडीर, राणा, मुकेश राणा, योगेश शर्मा, सुंदर सिंह आदि मौजूद रहे।
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अधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक
गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए जिले के किसानों एवं एनएचएआई के अधिकारियों के बीच बैठक में हर बिंदु पर वार्ता होगी। किसानों ने कहा कि सरकार ने कृषि भूमि, आबादी और हाईवे के नजदीक वाली जमीनों को चिह्नित कर एक ही मुआवजा प्रस्तावित करती है। यह किसानों के साथ नाइंसाफी है। वक्ताओं ने कहा कि परियोजना में शामिल तीनों तरह की जमीनों के रेट अलग-अलग तय होने चाहिए।

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रोहाना के किसानों ने एडीएम वित्त को सौंपा ज्ञापन
रोहाना कलां। जमीन का मुआवजा बढ़ाने को लेकर रोहाना कलां के किसानो ने अपर जिला वित्त अनिरुद्ध प्रताप सिंह को ज्ञापन दिया। कहा एक्सप्रेसवे के लिए सदर तहसील के करीब तीस गांव से गुजरेगा। इसमें किसानों की उपजाऊ भूमि के सर्किल रेट से महंगे रेट की है। गांव की जमीन स्टेट हाईवे के कारण मंहगी है। इसी वजह से सर्किल रेट बढ़ाकर छह गुणा मुआवजा निर्धारित किया जाए। इस मौके पर बाबा इंद्रबोस, सतबीर मास्टर, सुरेंद्र त्यागी, संजीव त्यागी व योगेश शामिल रहे।
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परिवार के एक सदस्य को मिले रोजगार: मलिक
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रोहाना गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन राकेश मलिक एडवोकेट कहते है किसानों की अधिग्रहित जमीन से रोजगार खत्म हो रहा है। किसानों को जमीन के मुआवजे के साथ परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाना चाहिए। ताकि किसानों बेरोजगार होने से बच सके।

एलिवेटिड़ रोड़ बनने से नुकसान
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पीपलशाह के किसान विनीत राणा की 11 बीघा जमीन इस योजना में जाने वाली है। उनका कहना है गांव से सटकर हाईवे बनने से अन्य जमीनों के रेट कम होंगे। चूंकि एलिवेटिड रोड़ बनने से कई चक अलग-अलग हो जाएंगे और किसान भूमिहीन और बेरोजगार होगा। एक युवक को रोजगार भी मिलना चाहिए।
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