बुढ़ाना कस्बे के एक बैंक्वेट हाल में शनिवार देर रात शाम-ए-दास्तान ओ गजल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शमां जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए कहा कि वे आप लोगों के साथ मन की बात करने आए थे। लेकिन मन की बात पर तो किसी ओर ने कब्जा कर लिया।
आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बता रहे हैं जो खुदा का पता, पते की बात है उनका न कोई ठिकना है। हिंदुस्तान में गंगा, जमुना के बीच की मोहब्बत को सभी जानते है। वे यहां भी भाईचारे का पैगाम देने आए हैं। कुछ ऐसी ताकते हैं जो उन्हें बांटना चाहती हैं।
एक ओर देश की सीमा पर तनाव है, तो दूसरी तरफ फिराक परस्त ताकतें देश के अंदर तनाव पैदा करना चाहती हैं। राष्ट्रीय एकता संगठन के अध्यक्ष क़ाजी नदीम अहमद और संगठन के पदाधिकारियों ने मेहमानों का स्वागत किया। जनाब बनज कुमार बनज (जयपुर) ने कहा कि फूलों के संग रह रहा, में माटी का ढेर मुझ में भी आ जाएगी खुशबू देर सवेरे।
जनाब अमीर इमाम (संभल) ने फरमाया कि धूप में कौन किसे याद किया करता है, पर तेरे शहर में बरसात तो होती होगी।। जनाब अहमद अल्वी (मेरठ), डॉ. रहमान मुसव्विर (दिल्ली ), जनाब मनोज अजहर (ठाकुर द्वारा) ने भी अपनी गजल से दर्शकों को प्रभावित किया।
डॉ. बकुल देव (जयपुर ) ने फरमाया कि हविस शामिल है थोड़ी सी दुआ में, अभी इस लौ में हल्का सा धुआं है, नया इक ख्वाब देखें और रोयें, अब इतनी ताब आंखों में कहां है। जनाब अकमल राही, जनाब अफजाल फ़ाजिल, जनाब गुलजार बुढ़ानवी, जनाब गोहर जमाली , जनाब तारिक़ उस्मानी जनाब सागर सैनी और अजहर इकबाल ने भी अपने गजल से नवाजा। गोई का संचालन अजहर इकबाल और मुशायरे का संचालन प्रो. रेहमान मुसव्विर ने किया मुशायरे की अध्यक्षता डॉ. अकमल रही ने की।