मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। गढ़मलपुर सागड़ी गांव में बीमार अबोध बालिका की अचानक मौत हो गई। बालिका को दफनाने के लिए परिवार व समाज के लोग तनाव में आ गए। गांव में कब्रिस्तान न होने केे कारण अबोध बालिका को दफन करने के लिए दो गज जमीन भी नही मिल पाई। ग्राम प्रधान के नेतृत्व में ग्रामीण समस्या को लेकर तहसीलदार के पास पहुंचे। तहसीलदार ने दो दिन बाद समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। परिजनों व समाज के लोग मृत बालिका को लेकर बुढ़ाना पहुंचे। बुढ़ाना के कब्रिस्तान में बालिका को सुपुर्दे खाक किया।
तहसील क्षेत्र के गांव गढ़मलपुर सागड़ी में ग्रामीण लियाकत की दो माह की बेटी पैदा होने के बाद से बीमार चल रही थी। मंगलवार को अबोध बालिका की बीमारी के कारण अचानक मौत हो गई। बालिका की मौत से परिवार में शोक व तनाव हो गया। गांव में कब्रिस्तान नही है, बालिका को कहां दफनाया जाए, इसी बात को लेकर बालिका के परिजन व समाज के लोग तनाव में आ गए। घटना की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान जितेंद्र मलिक पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे। बालिका को दफनाने की समस्या को लेकर विचार विमर्श हुआ।
ग्राम प्रधान पीड़ित परिवार के परिजनों व समाज के दर्जनों ग्रामीणों के साथ तहसीलदार सतीश चंद बघेल के कार्यालय पहुंचे। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों का तहसीलदार के साथ समस्या के समाधान को लेकर घंटों वाद विवाद हुआ। तहसीलदार ने दो दिन में ग्रामीणों की कब्रिस्तान की समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी समस्या का समाधान नही हुआ तो ग्रामीण अपने शव तहसील में दफनाएंगे। इस मौके पर लियाकत, शौकत, पीरू, राजीव, जितेंद्र मलिक, अमरजीत व रियासत सहित मुस्लिम अंसारी समाज के दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।
आठ माह से लंबित पड़ी है कब्रिस्तान की फाईल
गढ़मलपुर सागड़ी गांव में कब्रिस्तान न होने के कारण मुस्लिम वर्ग परेशान है। इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम प्रधान जितेंद्र मलिक ने ग्राम पंचायत की बैठक में ग्राम पंचायत की करीब 500 मीटर जमीन पर कब्रिस्तान बनाने का प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव को तहसीलदार की अनुमति के लिए भेजा गया है। आठ माह से यह फाइल तहसीलदार कार्यालय में लंबित पड़ी है। लंबित पड़ी फाइल के संबंध में तहसीलदार से वार्ता करनी चाही तो उनका फोन नही उठा।
रिश्तेदारी के गांवों में दफनाए जाते हैं शव
ग्राम प्रधान जितेंद्र मलिक ने बताया कि गांव में कब्रिस्तान न होने के कारण मुस्लिम समाज के लोग महिला की मौत होने पर उसके शव को दफनाने के लिए उसके मायके ले जाते है। अन्य की मौत होने पर उसे उनकी रिश्तेदारी वाले गांव में ले जाकर दफनाया जाता है।