बढ़ते स्टॉक से उद्यमियों के माथे पर चिंता की लकीरें
मुजफ्फरनगर। बिहार एवं अन्य जिलों के प्रवासी श्रमिकों के चले जाने की समस्या से जूझ रहे उद्योगों के सामने यहां तैयार माल का उठान नहीं होने का संकट भी खड़ा हो गया है। हालत यह है कि फैक्टरियों में स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है। बिक्री नहीं बढ़ी तो पेपर मिलों को बीच में ब्रेक देना पड़ सकता है। वहीं लोहा उद्योग ने जहां शुरू में अच्छी गति पकड़ी थी, अब उसकी डिमांड भी कम हो गई है। बाजार में पेपर और लोहा दोनों के रेट लगातार गिरते जा रहे हैं। पेपर उद्योग यहां देश में पहले नंबर पर है।
सिल्वरटोन पेपर मिल के मालिक अमित गर्ग का कहना है कि जिले की सभी पेपर मिले नियमित चल रही हैं। प्रवासी श्रमिकों के चले जाने पर स्थानीय श्रमिकों को रोजगार देकर मिल चलाई गई। लेकिन जिस गति से माल बन रहा है, इसका उठान नहीं है। सभी पेपर मिलों में स्टॉक बढ़ता जा रहा है। यदि स्टॉक ज्यादा बढ़ा तो पेपर मिलों को बीच में ब्रेक लेना पड़ेगा। दस दिन तक मिलें बंद हो सकती है। पेपर मिलों में समस्या यह है कि इनको कम समय पर नहीं चला सकते। या तो चलती रहेंगी या बंद करनी पड़ेगी।
लोहा उद्योग से जुड़े प्रमुख उद्यमी अनिल तायल कहते हैं कि बिहार और पूर्वांचल के श्रमिकों के चले जाने से लोहा उद्योग के सामने थोड़ी समस्या आई थी। हमारे यहां 15 प्रतिशत के लगभग बिहार प्रांत के मजदूर थे। श्रमिकों की समस्या के चलते ही लोहा मिलों को पूरी क्षमता पर नहीं चलाया जा सका। लॉकडाउन खुलने के बाद लोगों ने अपने रुके निर्माण कार्य पूरे किए, तब लोहे की डिमांड बढी। नया काम लोग शुरू नहीं कर पा रहे है। अब धीरे-धीरे डिमांड कम होनी शुरू हो गई है और रेट भी घटने लगे हैं। एनसीआर और दिल्ली में डिमांड कम है। लोहा उद्योग पर भी खतरा मंडराने लगा है।
पेपर में आठ रुपये किलो की गिरावट
मुजफ्फरनगर। पेपर उद्योग लगातार मंदी की चपेट में जा रहा है। बाजार में जो पेपर 26 रुपये किलो बिक रहा था, उसका रेट 18 रूपए किलो पर आ गया है। पेपर मिल मालिकों का कहना है कि इस समय उन लोगों के सामने घाटे की स्थिति पैदा हो गई है। लोहा भी दो हजार रुपये क्विंटल नीचे आ गया है।
100 करोड़ का व्यापार हुआ प्रभावित
मुजफ्फरनगर। आईआईए के चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि सामान्य रूप से जिले में पेपर का एक माह में 250 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। वर्तमान में यह घटकर 150 करोड़ रुपये पर आ गया है। इस समय सीधे एक माह में 100 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित है। इसके अलावा बाजार में पुराना रुका हुआ पैसा नहीं आ पा रहा है। यहां की मिलों का लगभग 500 करोड़ रुपया बाजार में फंसा हुआ है।