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कसौली में तेज आवाज के साथ आकाश से गिरा पत्थर, उल्का पिंड होने का अंदेशा

Fri, 29 Jun 2018 12:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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कसौली गांव में आकाश से गिरे पत्थर। - फोटो : अमर उजाला
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चरथावल के कसौली गांव में किसान के घर में बुधवार रात धमाके की आवाज के साथ एक पत्थर आकर गिरा। गिरते ही पत्थर के दो टुकड़े हो गए। पत्थरों का वजन करीब 310 ग्राम है। तहसील प्रशासन ने पत्थर के टुक ड़ों को जांच कराने के लिए क ब्जे में ले लिया है।
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ग्रामीणों ने इसके उल्का पिंड जैसा होने का अंदेशा जताया है। करीब 15 साल पूर्व भी कसौली में आकाश से 19 किलोग्राम का पत्थर का टुकड़ा गिरा था। तब भी घटना सुर्खियों में रही थी और देशभर के वैज्ञानिकों ने आकर जानकारी ली थी। बाद में पत्थर के उल्का पिंड होने की पुष्टि हुई थी।  
        
चरथावल क्षेत्र के कसौली गांव में बाहरी छोर पर सुखपाल सिंह का मकान है। बुधवार रात पूरा परिवार घर में सोया था।  रात करीब 12.30 बजे बिजली चली गई। सुखपाल की बेटी काजल और पुत्रवधू बाहर गैलरी में सोने के लिए बाहर निकलीं। इस बीच तेज आवाज के साथ एक पत्थर ऊपर से गिरा।
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पत्थर की आवाज से काजल घबरा गई। पूरब से पश्चिम दिशा की तरफ से आए पत्थर के गिरने से दो टुकड़े हो गए। पत्थर गिरने के बाद एक टुकड़ा करीब 20 मीटर दूरी पर जाकर गिरा तो दूसरा दीवार में टकरा गया। सुखपाल की भी तेज धमाकेदार आवाज से आंख खुल गई। उसने पत्थरों को हाथ में उठाकर देखा, तो दोनों टुकड़े इतने गर्म थे,

जैसे किसी भट्टी से निकले हों। बृहस्पतिवार को गांव में उल्का पिंड गिरने का शोर मच गया। सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। इस मामले की जानकारी होने पर एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र ने  लेखपाल आकाश शर्मा को मौके पर भेजकर पत्थर के दोनों टुकड़ों को जांच कराने जिला मुख्यालय पर मंगाया। एसडीएम ने बताया कि पत्थरों की जांच की जाएगी। यदि उचित हुआ, तो संबंधित जांच एजेंसी को भेजा जाएगा।            

कसौली में 15 साल पहले 19 किलो का गिरा था उल्का पिंड
चरथावल। कसौली गांव में किसान सुखपाल सिंह के मकान में बुधवार रात को आकाश से तेज आवाज के साथ पत्थर गिरने से ग्रामीणों को 15 साल पहले की याद ताजा हो गई। गांव में उस दौरान तेज आवाज के साथ 19 किलोग्राम का उल्का पिंड गिरा था। उल्का पिंड गिरने से कसौली का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ गया था। 

 कसौली गांव में 15 साल पहले तीन नवंबर 2003 को गांव में बाहरी छोर पर रहने वाले कृष्ण कुमार शर्मा के खाली प्लाट में 19 किलोग्राम का उल्का पिंड गिरने से दहशत फैल गई थी। तत्कालीन जिले के एसएसपी नवनीत सिकेरा ने इसरो बंगलूरू, अर्थ साइंस आईआईटी रुडकी और फिजिकल लेबोरेट्री अहमदाबाद को सूचना भेजी थी।

ग्राम प्रधान चंद्रबोष, पूर्व प्रधान के पति सुखपाल सिंह और आमिर ने बताया कि करीब डेढ़ दशक पहले तेज आवाज के साथ गांव में बाहरी हिस्से में पत्थर गिरने के बाद गांव अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर आ गया था। उसे देखने के लिए पूरे देश से खगोलीय वैज्ञानिक आए थे। खगोलीय वैज्ञानिकों ने सौरमंडल में टकराकर उल्का के रूप में पिंड गिरने की पुष्टि की थी। उसका वजन 19 किलोग्राम था।

किसान सुखपाल सिंह के मकान में बुधवार रात यह पत्थर गिरने की जानकारी जैसे ही सुबह ग्रामीणों को मिली, तो उनमें पत्थर देखने की होड़ लग गई। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। दोपहर बाद तक मकान पर लोगों की भीड़ लगी रही। एसडीएम के निर्देश पर गांव पहुंचे लेखपाल आकाश शर्मा ने दोनों पत्थरों को टुकड़ों को ले लिया। बाद में उसे एसडीएम को लेकर सौंप दिया गया।      

खतौली के मढ़करीमपुर गांव में भी गिरा था उल्का पिंड      
मुजफ्फरनगर। जिले में आकाश से उल्का पिंड गिरने की पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं। चरथावल के गांव कसौली में उल्का पिंड करने के बाद खतौली से सटे गांव मढ़करीमपुर में भी उल्का पिंड गिरा था। मढ़करीमपुर के प्रगतिशील किसान श्यामवीर सिंह  के मकान में नौ वर्ष पहले 26 जून 2009 की रात में यह पिंड गिरा था।

श्यामवीर ने बताया कि उस रात भी बरसात का मौसम था। तेज आवाज के साथ मकान के आंगन में आकाश से यह पिंड गिरा था, जो बेहद गरम था। यह भी नीचे गिरने के बाद दो भागों में टूट गया था। बाद में इस पिंड को देहरादून से आई टीम के वैज्ञानिक  डा भूपेंद्र सिंह अपने साथ ले गए थे। जांच में इसके उल्का पिंड होने की पुष्टि हो गई थी।        

पत्थर उल्का पिंड ही है : डॉ नीरज      
मुजफ्फरनगर। एसडी डिग्री कॉलेज के भूगोल के प्रवक्ता डॉ नीरज त्यागी ने बताया कि जिस तरह से तेज आवाज के साथ आकाश से यह पत्थर गिरा और वह गरम था, तो यह पत्थर उल्का पिंड ही है। उन्होंने बताया कि आकाश गंगा में उल्का पिंड घूमते रहते हैं, जो आपस में टकरा कर टूटते हैं, जो कि अधिक बड़े होते है वो नीचे जमीन पर गिरते है, छोटे टुकड़े वहीं पर खत्म हो जाते है। इनमें हाईड्रोजन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए गरम रहते हैं। उल्का पिंड गिरना खगोलीय प्रक्रिया है।      
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