मुजफ्फरनगर में रेलवे के मंसूबों पर किसानों का आक्रोश भारी पड़ गया है। खतौली से मंसूरपुर के बीच रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण रुक गया है। यहां पर रेल प्रशासन किसानों के आगे नतमस्तक हो गया है। आठ माह से कार्य ठप पड़ा है। मुजफ्फरनगर से आगे का कार्य कुछ स्थानों पर चालू है।
केंद्रीय राज्य कृषि मंत्री डॉ संजीव बालियान की पहल के बाद नई दिल्ली डिवीजन ने मेरठ से सहारनपुर तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी थी। करोड़ों रुपयों के इस प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग स्थानों पर कई संस्थाएं काम पर लगी हैं, जो दोहरीकरण के साथ रेलवे लाइन पर पड़ने वाले स्टेशन का भी निर्माण कर रही है। खतौली और मंसूरपुर के बीच रेलवे लाइन के दोहरीकरण पर ग्रहण लग गया है। जिसके चलते रेलवे के मंसूबों पर पानी फिर गया है।
सूत्रों की माने तो वर्ष 2017 तक ट्रैक का दोहरीकरण पूरा होना है, मगर किसानों के सख्त रुख के आगे रेलवे की एक नहीं चल रही है। किसानों ने सही रूप से मुआवजा न दिए जाने तक ट्रैक पर एक पत्थर तक लगाने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रखी है। इस कारण रेलवे प्रशासन ने काम से हाथ पीछे खींच रखे हैं। स्टेशन अधीक्षक विपिन कुमार त्यागी ने बताया कि रेलवे ट्रैक के कार्य के बारे में जानकारी नहीं है। मुख्यालय से ही कार्य की जानकारी ज्ञात हो सकती है। वैसे कई जगह काम रुका है।
उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष एवं किसान नेता राजू अहलावत ने बताया कि रेलवे प्रशासन किसानों के साथ दोहरी नीति अपना रहा है। सही मुआवजा मिले किसान की एक इंच भूमि का अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा। किसान मुआवजा मिले बिना दोहरीकरण नहीं होने देगा।