किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की सादगी और सरलता की स्मृतियां हर जन के दिलों में रची बसी हैं। किसानों के हक के लिए संघर्ष करने में उनके जज्बे को देश दुनिया में आज भी याद किया जाता है। उनके दौर में यूनियन पर कभी सियासत की आंच नहीं आ पाई। उत्पीड़न के विरोध में आंदोलन के महानायक के रूप में उन्होंने किसान और मजदूरों की राजनीति की दिशा बदलने की कुव्वत थी। उनके जज्बे को लोग आज भी सम्मान के रूप में याद करते हैं।
कस्बा सिसौली में जन्में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के कंधों पर मात्र आठ साल की उम्र में बालियान खाप के मुखिया का दायित्व डाल दिया। अल्पायु से संघर्ष की गाथा उनके अनूठी जीवन शैली के तर्जुबे की किताब बनती चली गई। वर्ष 1987 के मार्च माह में उन्होंने किसानों को एकजुट करने के लिए भारतीय किसान यूनियन का गठन किया। उसके बाद किसानों और मजदूरों की आवाज बनते चले गए। विद्युत निगम द्वारा बिलों में की गई बेतहाशा वृद्धि ने उन्हें आंदोलन की राह दिखाई।