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बदहाल व्यवस्था, दांव पर भविष्य

Wed, 30 Nov 2016 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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जिले के एक स्कूल में पढ़ते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के दयनीय स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इलाहाबाद ने कड़ी टिप्पणी की है, मगर बेसिक शिक्षा विभाग बदहाल स्कूलों के प्रति गंभीर नहीं है। जिले में भी कई ऐसे विद्यालय है, जो बदहाल है। इन में पढ़ने वाले बच्चों के साथ अनहोनी की आशंका हर समय रहती है। जिले के बदहाल विद्यालयों बच्चों का जीवन सुरक्षित नहीं है। विद्यालयों में शौचालय आदि भी सही स्थिति में नहीं है।
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इसके अलावा सर्दी के मौसम में भी परिषदीय विद्यालयों के बच्चे टाट पट्टी पर नीचे जमीन पर बैठने को मजबूर है। जिले में मात्र 20 फीसदी स्कूलों में ही फर्नीचर है। जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 1263 है, जिनमें से 811 प्राथमिक और 452 उच्च प्राथमिक स्कूल है। जनपद के ब्लाक शाहपुर के निरमाना, हरसौली, तावली, खतौली के मोहम्मदपुर माफी, बघरा ब्लाक के मांडी, लखान के स्कूल जर्जर हालत में है।       

जर्जर हालत में है मोहम्मदपुर माफी का स्कूल       
 खतौली। ब्लाक के गांव मोहम्मदपुर माफी के प्राथमिक विद्यालय के कमरे जर्जर हालत में हैं। विद्यालय में पूरी तरह से जर्जर हो चुके दो कमरों में खतरे की आशंका से बच्चों को अध्यापकों ने बैठाना बंद कर दिया है। विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कमरों की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। विद्यालय में सात कमरे बने हुए हैं। विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 115 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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इस विद्यालय के दो कमरे पूरी तरह से जर्जर हालत में हैं। हालात यह हैं कि दोनों कमरों की छतों में दरार आ चुकी है और सीमेंट के टुकड़े टूट-टूटकर नीचे गिर रहे हैं। इन कमरों में अध्यापकों ने खतरा बना रहने की आशंका की वजह से बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया है। इसलिए बच्चों को मजबूरन आंगनबाड़ी कार्यकत्री के बनाए गए कमरे और बरामदे में बैठाकर शिक्षा दी जा रही है।

जर्जर हो चुके कमरों की वजह से बच्चों को ठंड के मौसम में बरामदे में बैठाकर पढ़ाने के लिए अध्यापक विवश हैं। विभागीय अधिकारियों इस ओर कतई ध्यान नहीं हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यक संदीप कुमार का कहना है कि जर्जर कमरों के बारे में बीएएस और खंड शिक्षा अधिकारी को भी अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक न तो इन कमरों की मरम्मत की जा सकी और न ही नवीन भवन का निर्माण कराया जा सका है।      

मांडी के स्कूल में शौचालयों की छत, दरवाजे नहीं      
तितावी। बघरा ब्लाक के मांडी गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में शौचालयों की छत और दरवाजे तक नहीं है। ऐसे में बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रधानाध्यापक चश्मवीर सिंह कहते है कि इस संबंध में विद्यालय शिक्षा समिति और विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।      

टाट पट्टी पर बैठते है बच्चे      
छपार। महरायपुर के प्राथमिक स्कूल में 127 बच्चे अध्ययनरत है। बच्चों के लिए फर्नीचर नहीं है, जिस कारण बच्चे सर्दी के मौसम में ही टाट पट्टी पर बैठने को मजबूर हैं। छपार के प्राथमिक स्कूल नंबर में भी बच्चे जमीन पर टाट पट्टी और बोरे पर बैठ कर शिक्षा ग्रहण करते मिले। इन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों प्रमोद कुमार और चंद्रकिरण शर्मा कहते हैं कि विभाग की ओर से फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है, इसलिए टाट पट्टी पर ही बच्चे जमीन पर बैठते हैं।      

जिले के कुछ विद्यालयों का भवन पुराने हैं, जिनमें बच्चों को नहीं बैठाने के निर्देश शिक्षकों को दिए गए है। ऐसे विद्यालयों के नए भवन के लिए विद्यालय शिक्षा समिति को प्रस्ताव बना कर विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। सभी बीईओ को भी ऐसे स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जनपद में अधिकांश उच्च प्राथमिक स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था है, प्राथमिक विद्यालयों में अभी मात्र 20 प्रतिशत स्कूलों में ही फर्नीचर की व्यवस्था हो पाई है, जिस कारण बच्चे टाट पट्टी पर बैठते हैं।      
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- चंद्रकेश सिंह यादव, बीएसए, मुजफ्फरनगर      
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