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बीएचयू में प्रोफेसर की नियुक्ति के विवाद को बताया अफसोसनाक: उलमा

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मुफ्ती असद कासमी - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संस्कृत विषय के प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद को उलमा ने अफसोसनाक बताया है। उनका कहना है कि तालीम को मजहब से जोड़ा जाना सरासर गलत है। पहले मंदिर मस्जिद और अब तालीम के नाम पर बांटा जाना अफसोसनाक है।
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मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम व इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि देश में यदि हर चीज को मजहब के नाम पर बांटा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह के विवाद कभी देशहित में नहीं हो सकते। इससे देश टूट तो सकता है, लेकिन एकजुट नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि तालीम से मजहब का कोई ताल्लुक नहीं है। जो लोग इस तरह का विवाद पैदा कर रहे हैं वो नहीं चाहते कि देश में आपसी सौहार्द बना रहे। कहा कि इस तरह के विवाद अच्छे नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस तरह के विवादों का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे। ताकि मुल्क में अमनो अमान बरकरार रह सके।
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