मोरना। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने भगवद भक्ति को मानव जीवन का सच्चा आभूषण बताया। उन्होंने भागवत को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संगम बताया। भगवान को प्राप्त करने के लिए भक्ति, परमात्मा को जानने के लिए ज्ञान और आत्म कल्याण के लिए वैराग्य अत्यंत आवश्यक है।
तीर्थनगरी शुकतीर्थ के शुकदेव आश्रम में भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा का आयोजन मध्य प्रदेश के मेहर से आए भक्तों की ओर से किया गया है।
स्वामी ओमानंद ने कहा कि जब मनुष्य के जन्म-जन्मों के भाग्य उदय होते हैं, तभी उसे भागवत का आश्रय मिलता है। इससे मनुष्य में विवेक जाग्रत होता है, जो उसके अज्ञान और अहंकार का नाश करता है। स्वामी ओमानंद ने कहा कि संसार से विरक्ति और परमात्मा के चरणों में अनुरक्ति मानव कल्याण का सबसे बड़ा साधन है। उन्होंने सत्य आचरण, धर्म में निष्ठा और कर्तव्य परायणता के साथ जीवन जीने पर जोर दिया।
इससे पहले, स्वामी ओमानंद ने पोथी पूजन कर प्रयागराज से पधारे कथाव्यास रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य को व्यासपीठ पर सम्मानित किया। कथा के मुख्य यजमान रण बहादुर सिंह, शकुंतला सिंह, डॉ. अरविंद और आचार्य विकास शामिल रहे।