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राम मंदिर आंदोलन में गिरफ्तारी को उमड़ गए थे लोग

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सचिन सिंघल - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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आंदोलन को धार देने के लिए भक्तों ने दी थीं गिरफ्तारियां
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मुजफ्फरनगर। अयोध्या में राममंदिर के लिए कार सेवा करने को जिले के 27 विहिप कार्यकर्ताओं ने कूच किया था। इनकी खतौली में गिरफ्तारी हो गई थी। गिरफ्तारी के विरोध में भाजपा के 89 कार्यकर्ताओं ने शिवचौक पर गिरफ्तारी दी थी। इससे पूरे जिले में राम मंदिर निर्माण को लेकर जागरूकता फैली।
छह मार्च 1983 के हिंदू सम्मेलन के बाद जिले में राम मंदिर को लेकर लगातार आंदोलन होते रहे। राम शिला पूजन, चरण पादुका पूजन, राम ज्योति यात्रा से एक माहौल तैयार हुआ। धीरे-धीरे राम मंदिर निर्माण की मांग जोर पकड़ती गई। वर्ष 2003 में अयोध्या में कार सेवा को लेकर विहिप और भाजपा ने बड़ी योजना बनाई। अयोध्या में कार सेवा के लिए विहिप के 27 कार्यकर्ताओं ने सचिन सिंघल और राधेश्याम विश्वकर्मा के नेतृत्व में बस से कूच किया। पुलिस ने घेरा बंदी कर इन लोगों को खतौली में रोक लिया। राधेश्याम विश्वकर्मा बताते हैं कि एसएसपी नवनीत सिकेरा के समय में उनकी यह गिरफ्तारी हुई थी। पहली रात उन सभी लोगों को महिला जेल में रखा गया। दूसरे दिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने शिव चौक पर बड़ा आंदोलन किया। रिहाई की मांग को लेकर 89 लोगों ने कपिलदेव अग्रवाल, उमेश मलिक, संजय अग्रवाल, देशबंधु कौशिक, अशोक कंसल, विजय शुक्ला आदि के नेतृत्व में गिरफ्तारी दी। इन लोगों को भी रात में जेल में ही रखा गया। इससे अगले दिन सभी लोगों की रिहाई हुई। सचिन सिंघल कहते हैं कि उस समय राम मंदिर को लेकर माहौल बना हुआ था और हर कोई आंदोलन में बढ-चढकर भाग लेने को तत्पर था।
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परिक्रमा को लेकर हुई थी गिरफ्तारी
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 में विहिप कार्यकर्ताओं और पुलिस में परिक्रमा को लेकर टकराव हुआ था। यहां सचिन सिंघल और राधेश्याम विश्वकर्मा पुलिस से उलझ गए थे। बाद में पुलिस ने 30 विहिप कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। राधेश्याम विश्वकर्मा कहते हैं कि एसएसपी प्रवीण त्रिपाठी ने अनुमति देने के बाद भी परिक्रमा नहीं निकलने दी थी, जिसे लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं में तनाव हो गया था।

राधेश्याम विश्वकर्मा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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