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जमीयत के विलय पर जल्द होगा फैसला

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जमीयत के विलय पर जल्द होगा फैसला
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के दोनों गुटों को एक करने की कवायद तेज हो गई है। देवबंद में हुए जमीयत के अधिवेशन से शुरू हुई विलय की कोशिशों ने अब दिल्ली मुख्यालय में हलचल पैदा की हुई है। माना जा रहा है कि जल्द ही दोनों संगठनों के एक होने पर मुहर लग सकती है। इसके लिए बैठकों का दौर लगातार जारी है।
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वर्ष 2008 में वर्चस्व की लड़ाई के चलते जमीयत उलमा-ए-हिंद दो गुटों में बंट गई थी। एक जमीयत पर चाचा अरशद मदनी काबिज हुए और उसके अध्यक्ष बन गए। दूसरी जमीयत पर भतीजे मौलाना महमूद मदनी काबिज हुए और उन्होंने कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को अध्यक्ष बना दिया था। पिछले वर्ष कोरोना की चपेट में आकर कारी उस्मान की मौत हो गई। जिसके बाद वर्किंग कमेटी ने मौलाना महमूद मदनी को अध्यक्ष चुन लिया। इससे पूर्व मौलाना महमूद संगठन में राष्ट्रीय महासचिव की हैसियत रखते थे। 28 मई को देवबंद में हुए मौलाना महमूद मदनी के राष्ट्रीय अधिवेशन में जमीयत को एक करने का मुद्दा उठा। इसमें मौलाना अरशद मदनी भी शामिल हुए और उन्होंने इसको एक करने पर जोर दिया था। तभी से दोनों संगठनों को एक करने की कोशिशें तेज हो गईं। देवबंद से शुरू हुईं विलय की कोशिशें जमीयत के दिल्ली मुख्यालय में भी हलचल पैदा करने लगी हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद) के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने बताया कि हमारी तरफ से दोनों संगठनों को एक करने की पेशकश देवबंद में हुए अधिवेशन में हो गई थी। दो दिन पूर्व दूसरे संगठन की बैठक हुई। जिसमें यह मुद्दा उठा। बताया गया है कि वर्किंग कमेटी ने विलय को लेकर सभी इख्तियार मौलाना अरशद मदनी को दिए हैं। मौलाना महमूद के निर्देश पर 21 व 22 जुलाई को वर्किंग कमेटी की बैठक का आयोजन होगा। जिसमें विलय के फैसले पर मुहर लग सकती है। दोनों तरफ से यही कोशिशें की जा रही हैं।
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