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Muzaffarnagar News: बागपत की शहजादी को जिंदा जलाने वाले शौहर नदीम को मृत्युदंड

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सजा सुनाए जाने के बाद नदीम को जेल ले जाते पुलिसकर्मी : वीडियोग्रेब
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मुजफ्फरनगर। कस्बा शाहपुर में आठ साल पहले घरेलू विवाद में शहजादी (23) को मिट्टी का तेल (केरोसिन) से जिंदा जलाने के मामले में दोषी शौहर नदीम को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। वादी पिता समेत तथ्य के अन्य गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के बावजूद मजिस्ट्रेट को मृत्यु पूर्व दिया गया बयान सजा का आधार बना। न्यायालय ने लिखा कि अबला नारी को जिंदा जलाने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं है, उसे मृत्युदंड दिया जाना ही उचित है। अदालत ने सवाल उठाया कि यह आग कब बुझेगी।
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बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने अपनी पुत्री शहजादी का निकाह 10 जनवरी 2015 को शाहपुर की नई आबादी निवासी नदीम के साथ किया था। दंपती के घर में बेटे शादान का जन्म हुआ। 23 जुलाई 2018 को रात साढ़े आठ बजे विवाहिता के साथ मारपीट कर उसके ऊपर मिट्टी का तेल (केरोसिन) छिड़ककर आग लगा दी गई।
बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज और आनंद हॉस्पिटल मेरठ में उपचार कराया। गंभीर हालत के कारण दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को उसकी मृत्यु हो गई थी। मृतका का शरीर करीब 98 प्रतिशत तक जल चुका था और मौत की वजह जलना और सेप्टिक शॉक पाया गया था।
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वादी दिलशाद ने प्राथमिकी में दहेज के लिए प्रताड़ित करने, बाइक और एक लाख रुपये की मांग का आरोप लगाते हुए मृतका के पति नदीम, सास शमशीदा और ननद सोनी को नामजद किया था। पुलिस ने जांच के बाद दहेज हत्या के अलावा वैकल्पिक तौर पर हत्या की धारा में भी अदालत में तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
आरोपी सास की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी। सह-अभियुक्त ननद सोनी को साक्ष्य के अभाव में पिछले महीने 26 अगस्त बरी कर दिया गया था, जबकि पति पर दोष सिद्ध हुआ था। अभियुक्त पर प्रकरण में दहेज हत्या का मामला खारिज हो गया लेकिन साशय हत्या (धारा 302) सिद्ध हुआ।
सोमवार को अदालत ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए दोषी नदीम को मृत्युदंड और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने कुल 11 गवाह पेश किए।

शौहर को सजा तक ले गए शहजादी के आखिरी शब्द
मुजफ्फरनगर। 24 जुलाई 2018 को शाम 05:35 बजे सफदरजंग अस्पताल के बर्न विभाग के आईसीयू में भर्ती शहजादी का बयान दर्ज करने तत्कालीन कार्यपालक मजिस्ट्रेट/तहसीलदार (हौज खास सब-डिवीजन, दिल्ली) अशोक कुमार पहुंचे। पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी तीन साल पहले नदीम के साथ हुई थी। पति ने मुझे एक साल ठीक रखा, उसके बाद शराब पीकर लड़ना-पीटना शुरू कर दिया। बात-बात पर गाली देना और तलाक की धमकी देता था। 23 जुलाई 2018 की शाम लगभग सात बजे नदीम बाहर से शराब पीकर आया और मारपीट की। खाना खाने के बाद उसने फिर मारपीट की और कहा कि तुझे तलाक दूंगा। रात 08:30 बजे मेरे ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के कारण अदालत ने मृत्युपूर्व दिए गए इन बयानों को महत्वपूर्ण मानते हुए दोषी को सजा सुनाई। ब्यूरो

माफिया की धमकी पर लिखा...नहीं हूं डरपोक जज
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर छह अप्रैल से सात सितंबर तक 10 चर्चित प्रकरणों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। 18 अगस्त को उनकी कोर्ट से हत्या एवं अन्य गंभीर धाराओं की 100 पत्रावलियां तत्कालीन जिला जज ने प्रशासनिक आधार पर वापस मंगा ली थी। सोमवार को अदालत ने लिखा कि पश्चिम के माफिया-गैंगस्टर ने संपर्क का संदेश दिया कि अभी पत्रावलियों को हटवाया गया है। हमारे पीछे पड़े या कोई टिप्पणी की तो हम कोर्ट बदलवा देंगे या जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे...हमारे संपर्क ऊपर तक हैं। जज ने लिखा कि मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं।

सजा सुनाए जाने के बाद नदीम को जेल ले जाते पुलिसकर्मी : वीडियोग्रेब

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