संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। टीबी के संभावित हमले से लोगों को बचाने के लिए जिला अस्पताल में 5800 लोगों का सीवाई टीबी टेस्ट किया गया। इसमें 145 लोग पॉजिटिव पाए गए। इनमें एक व्यक्ति को पहले ही टीबी घोषित हो चुकी थी। चिकित्सक की सलाह पर बाकी 144 लोगों को टीबी से बचाने के लिए टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट शुरू कराया गया।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए जिले में टीबी की जांच और रोकथाम के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। अब टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए सीवाई टीबी परीक्षण की एक अत्याधुनिक त्वचा जांच प्रक्रिया में शामिल की गई है। इससे संक्रमण की पहचान अधिक तेज, सटीक और सरल हुई। सीवाई टीबी परीक्षण का उपयोग जिला अस्पताल में किया जा रहा है।
48 से 72 घंटे में ही सटीक जांच परिणाम
सीवाई टीबी जांच इंजेक्शन के माध्यम से की जा रही है। जांच के उपरांत सिर्फ 48 से 72 घंटे में ही सटीक परिणाम सामने आ जाते हैं। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो टीबी मरीजों के संपर्क में आए हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए भी सीवाई टीबी टेस्ट अनिवार्य किया गया है। करीब छह माह पहले चले 100 दिनी टीबी जांच अभियान के दौरान पाए गए उच्च
जोखिम वाले 5800 लोगों पर यह टेस्ट किया गया। इनमें 145 लोग पॉजीटिव पाए गए। इनमें एक मरीज का पहले ही टीबी का उपचार चल रहा था। जबकि बाकी 144 लोगों को टीबी से बचाने के लिए उनका टीपीटी यानी टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट शुरू कराया गया।
टीबी के निदान को जगी नई उम्मीद: डॉ.लोकेश चंद्रा
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.लोकेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि सीवाई-टीबी परीक्षण से टीबी के निदान और उपचार में एक नई उम्मीद जगी है। सीवाई-टीबी परीक्षण के उपरांत टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) दिया जाता है। उच्च जोखिम वाले लोगो की जांच कर 100 से अधिक लोगों को टीपीटी दिया जा रहा है।