शहर में मेरठ रोड पर एटीएम पर लगी नागरिकों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर। नोटबंदी के बाद बैंकों में कैश की किल्लत दूर होने का नाम नहीं ले रही है। आरबीआई स्तर से पर्याप्त रूप में पैसा नहीं मिल सका है। जिसके चलते बैंकों, एटीएम पर नागरिकों की लाइन टूट नहीं रही है। हालात ऐसे हैं कि सुबह से शाम तक बैंकों पर कतारें हैं। नई करेंसी के रूप में शहर में 500 का नोट नहीं आने से अधिक समस्या बनी हुई है।
नोटबंदी को एक माह से अधिक समय बीत गया, लेकिन बैंक शाखाओं का हाल-बेहाल है। कैश के टोटे से नागरिक हलकान हैं। दिन निकलते ही काम-काज छोड़ महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बैंकों की ओर दौड़ लगा रहे है। बैंकों में पैसों से अधिक भीड़ जुट रही है। चंद घंटों में ही बैंकों के बाहर नो-कैश के बोर्ड लटक रहे हैं। जिसे देखकर जनता बेचैन हो गई है।
31 दिसंबर तक ही पुरानी करेंसी बैंकों में जमा हो सकती है। इसके बाद सीधे आरबीआई में जमा करानी पड़ेगी। जिसके चलते बैंकों पर रुपये निकालने वालों के साथ जमाकर्ता भी जुट रहे हैं।
एटीएम पर रुपये निकालने वालों की भीड़ है। शहर में एसबीआई की शाखा के साथ एटीएम कैश की किल्लत को दूर करने में सहयोग कर रहे हैं, अन्य शाखाओं के एटीएम या तो बंद है या उनमें कैश नहीं है। उधर, जनपद में सभी बैंकों की 274 शाखाएं हैं। इन शाखाओं को लीड बैंक पीएनबी की ओर से ही पैसा दिया जाता है।
पर्याप्त रूप से बैंकों में पैसा नहीं पहुंच रहा है, ऐसे में बैंक खाताधारक को सप्ताह में 24 हजार के बजाए दो से पांच हजार रुपये देकर की काम चला रहे हैं। कैश की भारी कमी होने से भी बैंकों के बाहर लाइन है। एलडीएम शशि कुमार जैन ने बताया कि जनपद में कैश की कमी है। आरबीआई स्तर से एक बार में 31 करोड़ और दूसरी बार में 23 करोड़ रुपये मिल पाए हैं। यह पर्याप्त नहीं है। लगातार डिमांड भेजी जा रही है।