मोरना (मुजफ्फरनगर)। ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद सरस्वती की श्रद्धाजंलि सभा और षोडशी भंडारे में पहुंचे संत, महात्माओं ने उनकी पावन स्मृतियों को नमन किया। हनुमतधाम के नए उत्तराधिकारी स्वामी आनंद स्वरूप सरस्वती को महामंडलेश्वरों और महात्माओं ने मंत्रोच्चार के साथ चादर विधि से दायित्व सौंपा। उधर, शोक सभा में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी शामिल हुए।
हनुमतधाम में ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद सरस्वती की समाधि पर विधि-विधान से पूजन किया गया। वृंदावन के मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज ने कहा कि स्वामी केशवानंद महाराज विशाल हृदय के स्वामी थे। कुरुक्षेत्र से पधारे गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने कहा कि संत सत्य को शरीर से जोड़ता है। उसकी सोच विराट कार्यों से जुड़ती है। पंच लौकिक शरीर नहीं है, लेकिन वह हमारे बीच में हमेशा रहेंगे।
महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर चंदेश्वर आनंद महाराज ने कहा संन्यास ब्रह्म सूत्र को चरितार्थ करने के लिए बनाया गया है। महामंडलेश्वर अभयानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर गिरधानंद महाराज, महाबलेश्वर यतींद्र नंद महाराज, स्वामी दिव्यानंद गिरि महाराज, स्वामी राधेश्वरानंद महाराज, महामंडलेश्वर आत्मानंद महाराज ने कहा कि उन्होंने हनुमत धाम का विकास किया।
अध्यक्षता कर जम्मू-कश्मीर से पधारे राजगुरु अटल पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद सरस्वती ने कहा पुण्य वही रहता है महापुरुष की आत्मा कहीं भी रहे। बागपत के श्री शिव गोरखनाथ आश्रम भगवानपुर नांगल से पधारे स्वामी अर्जुन नाथ, मास्टर विजय सिंह, साध्वी प्राची आर्या, स्वामी आत्म चेतना महाराज, महानिर्वाणी पंचायती अखाड़ा अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने विचार रखे संचालन मुम्बई से पधारे स्वामी चिदंबरा सरस्वती महाराज ने किया।
तीर्थ का गौरव थे स्वामी केशवानंद : ओमानंद
(फोटो समाचार)
मोरना। श्री शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने स्वामी आनंद स्वरुप सरस्वती को तिलक कर पुष्प माला पहनाई। श्रद्धालुओं के जयकारे के बीच स्वामी आनंद स्वरूप आशीर्वाद पाकर भाव विह्वल हो गए। स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि महाभारतकालीन, ऐतिहासिक भागवत जन्मभूमि में हनुमतधाम का भव्य निर्माण कर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने देश में शुकतीर्थ का नाम रोशन किया।
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संत के संकल्पों को करेंगे पूरा : सतीश महाना
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मोरना। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शुकतीर्थ में आयोजित शोक सभा में कहा कि कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज के संकल्प को पूरा करना सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हनुमतधाम में भव्य सत्संग भवन और यात्री आवास का निर्माण संत का संकल्प था। उनकी स्मृतियां सदैव सनातन धर्म की सेवा को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने समर्पण भाव से हनुमतधाम को राष्ट्रीय स्तर पर गरिमा प्रदान की।
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि स्वामी केशवानंद महाराज की मेरे जीवन पर बड़ी कृपा थी। पौराणिक शुकतीर्थ के विकास में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। रालोद सांसद चंदन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल, पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद शर्मा, यशपाल पंवार, अमित राठी, अरुण खंडेलवाल, अमरीश गोयल, पूर्व प्रधान नीरज रॉयल, राम कुमार शर्मा, टिकोला चीनी मिल निदेशक निरंकार स्वरुप, विनोद सिंघल अर्पित किए।
इन्होंने भी दी श्रद्धांजलि
श्री राम आध्यात्मिक प्रन्यास के सचिव स्वामी विज्ञानानंद महाराज, ट्रस्ट के अध्यक्ष आरके.टन्डन, कृष्ण बंसल, कंवरसेन गोयल, राजेंद्र सिंघल, नरेश सिंघानिया, विवेक शील, राजकुमार, दंडी आश्रम के प्रबंधक मनोहर शर्मा, श्री शुकदेव आश्रम ट्रस्ट सचिव कुंवर देवराज पंवार, ओमदत्त देव, कथा व्यास सुमन कृष्ण शास्त्री, अजय कृष्ण शास्त्री आदि मुख्य रहे।
पिलखुवा से निकले वैराग्य मार्ग पर
हनुमतधाम की सेवा में 40 वर्ष से जुटे स्वामी आनंद स्वरूप सरस्वती पिलखुवा क्षेत्र के गांव घोढा से वैराग्य मार्ग पर निकले। गांव के विद्यालय में पांचवी तक शिक्षा ग्रहण की और बड़े भाई के साथ ट्रांसपोर्ट कार्य में लग गए। सांसारिक जीवन में मन नहीं लगा और युवावस्था में गृह त्याग दिया। महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में हनुमान उपासक बन गये। पिता तारा चंद और परिजन उन्हें घर ले जाने आये, मगर फिर वे नहीं लौटे। गुरु सेवा में रहकर संन्यास की दीक्षा ली और अब हनुमतधाम के नए उत्तराधिकारी बनाए गए।