छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल सीआरपीएफ के जांबाज सिपाही सचिन कुमार छह दिन की जद्दोजहद के बाद जिंदगी की जंग हार गया। दिल्ली के एम्स में उसने अंतिम सांस ली। जवान की शहादत पर रुमालपुरी गांव में शोक की लहर है। देर शाम उसका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, जहां सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव रुमालपुरी निवासी किसान भूषण सिंह का बेटा सचिन कुमार सीआरपीएफ की 150वीं बटालियन का जवान था। उसकी वर्तमान में तैनाती छत्तीसगढ़ के सुकमा में थी। नक्सली हमले के दौरान 26 अगस्त को माइन फटने से सचिन के दोनों पैरों में गंभीर चोट आई थी। उसे गंभीर हालत में रायपुर में भर्ती कराया गया था, जहां जवान का एक पैर चिकित्सकों को काटना पड़ा। शरीर में संक्रमण फैलने पर 29 अगस्त को उसे दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया।
जिंदगी की जंग में वह हार गया। बृहस्पतिवार की सुबह उसने अंतिम सांस ली। बेटे की शहादत की खबर जैसे ही रुमालपुरी गांव में पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद के माता-पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। देर शाम शहीद सचिन का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। जहां ग्रामीणों और रिश्तेदारों की अंतिम दर्शन के लिए भीड़ जुटी थी। पति के शव को देखकर पत्नी मीनू बेहोश हो गई। देर रात गांव के नजदीक ही शहीद जवान का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
सीआरपीएफ के अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित किए और जवानों ने मातमी धुन के साथ अंतिम सलामी दी। सीआरपीएफ की 144वीं बटालियन में श्रीनगर में तैनात सचिन के भाई अंकित ने बताया कि माइन का विस्फोट बेहद खतरनाक था, जिसमें सचिन के शरीर के नीचे का हिस्सा डैमेज हो गया था। तमाम कोशिशों के बावजूद भाई को नहीं बचाया जा सका।
शहीद के अंतिम संस्कार में सांसद भारतेंद्र सिंह, सीआरपीएफ के डीआईजी जगजीत सिंह, डीएम डीके सिंह, एसएसपी दीपक कुमार, ब्लाक प्रमुख योगेश कुमार, रालोद जिलाध्यक्ष अजित राठी, अभिषेक चौधरी, चंदन सिंह चौहान, यशपाल पंवार, नजर सिंह, मुखिया गुर्जर, डॉ वीरपाल निर्वाल, सुखदर्शन बेदी आदि शामिल हुए।