खतौली में मौलवी से अभद्रता करने के आरोप में आखिरकार तहसीलदार राकेश कुमार पर गाज गिर ही गई। डीएम ने तहसीलदार राकेश कुमार को सदर तहसील में अपर तहसीलदार बनाया, जबकि सदर तहसील के अपर तहसीलदार अशोक गुप्ता को जानसठ का तहसीलदार बनाकर भेजा है। देर शाम को अशोक गुप्ता ने तहसील पहुंचकर चार्ज भी संभाल लिया। लेखपाल के विरुद्ध अभी तक विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बुधवार की रात को दुकान के लेंटर का निर्माण कार्य रुकवाने पहुंचे तहसीलदार राकेश कुमार, लेखपाल रामनारायण व दो हमराह होमगार्ड पर मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिद के मौलवी के साथ अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया था। इतना ही नहीं भड़के लोगों ने हाईवे पर जाम व थाने में हंगामा करते हुए तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उस वक्त मौके पर पहुंचे एसडीएम उमेश चंद मिश्र व एसपी क्राइम राकेश कुमार जौली ने अधिकारियों से बातचीत की थी। दोनों अधिकारियों ने आला अफसरों से बातचीत करने पर ही भीड़ का गुस्सा शांत करने के लिए लेखपाल को निलंबित करने तथा तहसीलदार से चार्ज लेने का आश्वासन दिया था। बुधवार देर रात को ही एडीएम मनोज कुमार ने भी एसडीएम से घटना के बारे में जानकारी ली थी।
सपा कार्यकर्ताओं ने इस प्रकरण की शिकायत लखनऊ भी की थी। बृहस्पतिवार की शाम को जिलाधिकारी डीके सिंह ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार राकेश कुमार को हटाते हुए सदर तहसील का अपर तहसीलदार तथा सदर तहसील के अपर तहसीलदार अशोक गुप्ता को जानसठ तहसीलदार का पद संभालने के आदेश जारी किए। देर शाम राकेश कुमार ने उनको तहसीलदार का चार्ज सौंप दिया। एसडीएम उमेश चंद मिश्र ने बताया कि लेखपाल रामनारायण के खिलाफ अभी निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है। अधिकारियों के आदेश मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पहले रोक लगती तो, इतना बड़ा नहीं होता हंगामा
तहसीलदार राकेश कुमार द्वारा बुधवार की रात को मस्जिद के मौलवी से अभद्रता करने के बाद हुए हंगामे की घटना के संबंध में मस्जिद से जुड़े मुस्लिम समाज के लोग तहसील में एसडीएम उमेश चंद मिश्रा से मिले। मुस्लिमों का कहना था कि उनके द्वारा निर्माण कार्य शुरू होने पर ही तहसील प्रशासन को अवैध निर्माण करने की सूचना दे दी गई थी। अगर पहले ही तहसील प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण कार्य पर रोक लगा दी जाती तो, इतना बड़ा हंगामा खड़ा नहीं होता।
समाजसेवी अब्बास अली के नेतृत्व में सराफत, हाजी हनीफ, सादिक, छोटा व खुर्शीद बृहस्पतिवार को तहसील में एसडीएम उमेश चंद मिश्रा से मिले। इन लोगों ने एसडीएम को बताया कि मस्जिद के बाहर बराबर में अहमद अली ने अवैध तरीके से दुकान का निर्माण किया है। इस अवैध निर्माण की जानकारी तहसीलदार व लेखपाल को दे दी थी।
इसके बावजूद उस वक्त इस अवैध निर्माण को रोका नहीं गया। मस्जिद के मौलवी का इस अवैध निर्माण से कोई मतलब वास्ता नहीं था। बुधवार की रात को जो घटना घटी व घोर निंदनीय है। तहसील प्रशासन अगर पहले ही रोक लगा देता तो, इतना बड़ा हंगामा नहीं होता। एसडीएम ने बताया कि यह भूमि पीडब्ल्यूडी की है। एक्सईएन को जांच पड़ताल कर कार्रवाई के लिए लिखकर भेज दिया गया है।