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जमालपुर में आयकर विभाग का छापा  

Sat, 17 Jun 2017 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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राजवीर सिंह से पूछताछ करते आ‌यकर अ‌िध्ाकारी। - फोटो : amar ujala
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मुजफ्फरनगर। आयकर विभाग की टीम ने जमालपुर गांव में दिनभर सिंचाई विभाग से जुड़े ठेकेदार राजवीर सिंह के रिकार्ड खंगाले। लंबी पूछताछ के बाद अफसरों को कई ऐसे दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनमें अनेक बेनामी संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। ठेकेदार के मुजफ्फरनगर और मेरठ के रिश्तेदारों के नामों पर संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी भी टीम को मिली है। देर शाम तक छापे में जांच की कार्रवाई जारी थी।      
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मीरापुर थाने के जमालपुर गांव निवासी राजवीर सिंह के बेटे अजय के नाम से मेरठ के गंगानगर इलाके में अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी है। राजवीर की गिनती सूबे के बड़े ठेकेदारों में होती है। शुक्रवार सुबह आठ बजे आयकर विभाग ने इनके घर, दफ्तर और गांव में एकसाथ छापेमारी की। डिप्टी डायरेक्टर राजेश कुमार के नेतृत्व में चार गाड़ियों में पहुंची 15 सदस्यों की टीम ने राजवीर के गांव में छानबीन की। छापे के समय राजवीर सिंह गांव के घर पर थे, जबकि दो बेटे अजय और विजय मेरठ एवं तीसरा बेटा हरिद्वार में था। टीम ने परिवार के सभी सदस्यों को अपने घेरे में ले लिया। टीम के साथ आई पुलिस घर के बाहर तैनात हो गई। परिवार के किसी सदस्य को न बाहर निकलने दिया गया और न ही बाहर के किसी व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत दी गई। घर के सभी सदस्यों के मोबाइल कब्जे में ले लिए गए। टीम ने सभी सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की। टीम ने गांव में जमीन और मेरठ में मार्केट, कोठी, दफ्तर, प्लाटों के बारे में जानकारी ली। घर की अलमारियां और संदूक खुलवाकर सभी दस्तावेज कब्जे में लिए गए। टीम कंप्यूटर हार्डडिस्क के बारे में भी पूछताछ कर रही थी। राजवीर के मोबाइल से भी कुछ नंबर लिए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक राजवीर के घर से जमीनों के बैनामे और विभिन्न बैंकों की पासबुक आदि दस्तावेज जांच के लिए कब्जे में लिए गए हैं। टीम को दस्तावेजों के आधार पर यह भी जानकारी हाथ लगी है कि ठेकेदार ने मुजफ्फनगर के बुआड़ा, सौंपरी और मेरठ के मवाना आदि के रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीद रखी हैं। घर से ऐसे कागजात भी हाथ लगे हैं, जिनमें कई अघोषित संपत्तियों की जानकारी मिली है। डिप्टी डायरेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि जांच के लिए कुछ दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं। अभी उनकी छानबीन की जाएगी। देर शाम तक छापे की कार्रवाई जारी थी। टीम ने बाहर से खाना मंगवाया है। माना जा रहा है कि देर रात तक जांच-पड़ताल जारी रहेगी। छापेमारी में आयकर विभाग की टीम में आफिस सुपरीटेंडेंट वंदना शर्मा, इंस्पेक्टर पंकज शर्मा, इनकम टैक्स आफिसर गंभीर चौहान समेत तीन अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।    
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रिटायर्ड जेई से एक्सईएन तक हैं कंपनी में कार्यरत       
मुजफ्फरनगर। दस सालों में राजवीर सिंह अकूत संपत्ति के मालिक बन गए। जांच में उनके पास कोठी, लग्जरी कारें, दुकानें, मार्केट और कई शहरों में प्लाट होने की जानकारी मिली हैं। सभी दस्तावेजों की बारीकी से छानबीन की जा रही है। जांच में कई ऐसे दस्तावेज भी टीमों के हाथ लगे हैं, जिनसे पता चला है कि उनके परिचित और रिश्तेदारों के नाम भी संपत्तियां की गई हैं। अलग-अलग नामों से मिली बैंक की पासबुक भी इसी ओर इशारा कर रही हैं। टीम ने ऐसे संपत्तियों को चिन्हित कर लिया है। संबंधित रिश्तेदारों से पूछताछ की जाएगी कि उनके पास इतनी संपत्ति कहां से आई। उसके रिकार्ड भी खंगाले जाएंगे। टीम ने जांच में अभी कुछ और समय लगने की संभावना जताई है। जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि राजवीर सिंह की कंपनी में लगभग 200 लोग काम करते हैं। इनमें सिंचाई विभाग से रिटायर एक्सईएन, एसडीओ और जेई तक शामिल हैं। राजवीर सिंह से मिलकर काम करने वाले अधिकारियों को यह भी फायदा होता था कि रिटायर होने के बाद उन्हें कंस्ट्रक्शन कंपनी में मोटी तनख्वाह पर जॉब भी मिल जाती थी।

विभाग के अधिकारी ही कंपनी के लोगों को ठेके लेने और निर्माण कार्यों में कमाई के तरीके बताते थे। चर्चा इस बात की भी है कि कंपनी से नाखुश पूर्व अधिकारी ने ही इनकम टैक्स को अंदर की जानकारी पहुंचाई है। इसके बाद ही विभाग ने पूरी तैयारी के साथ ठेकेदार की कंपनी के दफ्तर, कोठी और गांव स्थित मकान पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की है। आयकर विभाग को यह भी जानकारी मिली है कि वर्ष 2008 की करीब पांच करोड़ की देनदारी की वजह से राजवीर को ब्लैक लिस्टेड किया गया था। इसकी रिकवरी भी जानसठ तहसील में पहुंची थी, लेकिन सरकार में रसूख रखने पर उसे दबा दिया गया। बाद में बेटे के नाम से राजवीर ने कंस्ट्रक्शन कंपनी खड़ी कर दी।

सपा सरकार में पांच साल चला सिक्का      
मुजफ्फरनगर। सपा सरकार में राजवीर की अजय कंट्रक्शन कंपनी का जमकर डंका बजा। राजवीर के बेटे अजय की सपा हाईकमान में रहे एक बड़े कद्दावर नेता से भी नजदीकियां रही हैं। यही वजह थी कि कंपनी के लोग विभाग के अफसरों को भी कुछ नहीं समझते थे। पिछले दिनों ठेके के निर्माणाधीन काम की जांच करने पहुंचे एक एक्सईएन को भी कंपनी के लोगों ने धमकाकर भगा दिया था। इसी तरह मथुरा के एक ठेके में सिंचाई विभाग के एक बड़े अफसर के फाइल पास नहीं करने पर उसे लखनऊ से फटकार लगवाई गई थी। अजय कंस्ट्रक्शन कंपनी ए श्रेणी में शुमार है। कंपनी के सीधे लखनऊ से ताल्लुकात थे। सीधे लखनऊ से उन्हें ठेके मिलते थे। सपा सरकार में इस ठेकेदार का जमकर सिक्का चला। भाजपा की सरकार आते ही कंपनी के कई काम लटक गए। सूत्रों के मुताबिक अभी हाल ही में मेरठ में करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीदने के बाद से आयकर विभाग की नजर कंपनी पर पड़ी। दस्तावेज खंगाले गए तो सरकारी अफसरों और ठेकेदार के बीच गठजोड़ की जानकारी सामने आई। जांच में अफसर यह भी मान रहे हैं कि कंपनी ने पिछली सरकार के पांच सालों में कई गुणा कमाई की है। अब यह देखा जा रहा है कि कमाई गई रकम को कहां-कहां खपाया गया है।   
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