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पुलिस कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

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पुलिस कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
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मुजफ्फरनगर। नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के गांव मखियाली में मंगलवार देर रात दबिश के दौरान हुई मदनपाल की हार्टअटैक से मौत के बाद बुधवार सुबह गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए लाश को हाईवे पर रखकर जाम लगाने का भी प्रयास किया। इस पर फोर्स के साथ पहुंचे एसपी सिटी सतपाल अंतिल ने बमुश्किल लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया।
नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के गांव मखियाली में जिलाबदर बताए जा रहे मोनू की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने पहुंची पुलिस मदनपाल की हार्टअटैक से मौत होने के बाद करीब दस घंटे तक पूरी तरह से पुलिस बैकफुट पर रही। शुरूआत में मामले को गंभीरता से न लेते हुए थाना पुलिस ने इसे सामान्य समझा, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता चला गया। चुनावी माहौल के मद्देनजर विभिन्न पार्टियों ने इसे तूल देना शुरू कर दिया। आखिरकार दिन निकलते-निकलते गांव में विभिन्न दलों के नेताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। पुलिस पर और अधिक दबाव बनाने के लिए सुबह करीब नौ बजे मदनपाल की लाश हाईवे पर रखकर जाम लगाने की तैयारी की जाने लगी। हालात बिगड़ते देख एसपी सिटी सतपाल अंतिल के नेतृत्व में सीओ सिटी हरीश सिंह भदौरिया, सीओ नई मंडी योगेंद्र सिंह, सीओ जानसठ सोमेंद्र सिंह नेगी के साथ ही जानसठ, सिखेड़ा व मंसूरपुर समेत कई थानों की फोर्स मौके पर भेजी गई। इसके बाद ही गुस्साए लोगों को किसी तरह समझा-बुझाकर बामुश्किल शांत करते हुए उन्हें गांव में रखा गया।
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पुलिस प्रशासन की अदूरदर्शिता से पल-पल बिगड़े हालात
मुजफ्फरनगर। गांव मखियाली में मंगलवार देर रात जिलाबदर मोनू के घर दबिश के दौरान उसके पिता मदनपाल पुत्र बलबीर की हार्ट अटैक से मौत के मामले में थाना पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। परिजनों का आरोप है कि दबिश के दौरान मोनू के साथ ही उसकी मां ओमवती व पिता मदनपाल के साथ हाथापाई की गई। खींचतान व मारपीट में जहां बुजुर्ग दंपती के कपड़े फट गए, वहीं ओमवती घायल भी हो गईं। इसी दौरान मदनपाल को हृदयाघात हुआ और वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसके बावजूद थाना पुलिस असंवेदनशील बनी रही और मदनपाल को ऐसे ही छोड़कर लौट आई। परिजन मदनपाल को आनंद हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि इसके बावजूद थाना पुलिस का रवैया पूरी तरह से असंवेदनशील बना रहा और मदनपाल की मौत की जानकारी मिलने के बावजूद मोनू को छुड़ाने थाने पहुंचे परिजनों से बदसलूकी कर उन्हें वहां से भगा दिया गया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने रात में ही गांव में हंगामा शुरू किया, तब कहीं जाकर पुलिस बैकफुट पर आई और ग्राम प्रधान संजय को थाने बुलाकर मोनू को उसकी सुपुर्दगी में सौंपा।
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