भौराखुर्द नहीं, खूनी भौरा के नाम से चर्चित था गांव
मुजफ्फरनगर। भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव भौराखुर्द का नाम वर्ष 1989 में पहली बार अपराध की दुनिया में सामने आया, जब गांव के राजपाल की हत्या हुई। इसमें भौराखुर्द निवासी शोभाराम व उसके परिजनों का नाम सामने आया। चार साल बाद गांव में ही शिमला पत्नी जगबीर और वर्ष 1997 में बारू पुत्र छज्जू पर कातिलाना हमला हुआ। उक्त दोनों वारदातों में भी शोभाराम व उसके परिजन ही नामजद हुए थे।
वर्ष 2004 में गांव की यह रंजिश तब वीभत्स हुई, जब चर्चित शोभाराम पक्ष के सामने गांव के ही सतीश व उसके भाइयों हरीश व आदेश बालियान पुत्रगण ब्रह्मपाल खड़े हुए। वर्ष 2004 में शोभाराम के बेटे सुखपाल की हत्या कर दी गई, जिसमें आदेश का भाई हरीश व पिता ब्रह्मपाल नामजद हुए। इस मामले में आदेश पक्ष के सात लोगों को वर्ष 2016 में कोर्ट से सजा हुई, जबकि हरीश इस मामले में फरार घोषित किया गया। इसके बाद तो गांव में हत्याओं की झड़ी लग गई। वर्ष 2004 में ही आदेश पक्ष के माने जाने वाले गांव के सुखबीर, बिल्लू पुत्र सुखबीर की हत्या हुई, जिसके बाद 2004 में ही शोभाराम पक्ष ने आदेश पक्ष के ब्रह्मपाल की हत्या कर दी। इसके बाद वर्ष 2005 में शोभाराम पक्ष के चौबसिंह की हत्या हुई तो दूसरे पक्ष द्वारा 2005 में ही आदेश के भाई सतीश को कत्ल कर दिया गया। इसके बाद तो वर्ष 2010 तक दोनों पक्षों द्वारा लगातार एक-दूसरे पक्ष के लोगों को मौत के घाट उतारा गया, जिनमें अधिकांश लोग बेगुनाह थे, जो महज इसलिए कत्ल कर दिए गए कि उन्होंने किसी भी एक पक्ष के साथ बातचीत कर ली या उसके साथ खड़े हो गए। फिलहाल की बात करें तो शोभाराम पक्ष के अधिकांश लोग जेल में हैं। आदेश बालियान का सोमवार देर रात एनकाउंटर कर दिया गया तो उसका भाई दो लाख का इनामी हरीश फरारी काट रहा है।
खौफ ऐसा कि घरों से निकलना हो गया बंद
मुजफ्फरनगर। गांव भौराखुर्द निवासी शोभाराम व आदेश पक्ष के बीच चली इस खूनी अदावत ने खौफ का ऐसा मंजर तैयार किया, जिसमें गांव का नाम ही बदलकर खूनी भौरा हो गया। दहशत का आलम ऐसा कि दोपहर बाद किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह खेतों की तरफ चला जाए। अदावत ऐसी कि ग्रामीण किसी के साथ बात करने या उसके साथ खड़े होने से भी कतराने लगे। वहीं, फेरीवाले व घुमंतू दुकानदारों ने भी भौराखुर्द तो दूर, उसकी सीमाओं से होकर गुजरना भी छोड़ दिया।
एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि भौराखुर्द गांव में दो पक्षों की रंजिश में इस कदर खौफ था कि गांव व उसके आसपास के क्षेत्र भी खाली हो गए थे। आदेश व हरीश का तो इतना खौफ था कि दोनों किसी को भी देखते ही गोली मार देते थे। आदेश की एनकाउंटर में मौत के बाद अब गांव के लोग बड़ी राहत महसूस करेंगे।