मुजफ्फरनगर। बड़ौत के गांव बड़ौली निवासी पिता और पुत्र को बंधक बनाकर कुछ युवकों ने ढाई माह तक मजदूरी कराई। विरोध करने पर मजदूरी के रुपये भी नहीं दिए। परिजनों की शिकायत पर समाजसेवी महिला और पुलिस ने गांव में दबिश देकर दोनों को बंधनमुक्त कराया।
बागपत जिले के बड़ौत के गांव बड़ौली निवासी दिव्यांग राजेंद्र और उसके पुत्र विनोद ने काफी समय पहले जमीन-घर बेच दिया था। दोनों पिता-पुत्र ढ़िकौली में अपने रिश्तेदार के यहां रह रहे थे। जुलाई माह में ढ़िकौली का पप्पू दोनों को तितावी में डेयरी पर नौकरी करने के लिए ले आया। तितावी के गांव करवाड़ा में दोनों पिता-पुत्र को डेयरी पर पशुओं की देखभाल के लिए लगवा दिया। यहां डेयरी संचालकों ने दोनों को बंधक बना लिया। दोनों से करीब ढाई माह तक बंधक बनाकर मजदूरी कराई। बंधक बनाए जाने की शिकायत ढ़िकौली में रिश्तेदारों को मिली। उसके बाद पुलिस से शिकायत की गई।
बृहस्पतिवार को समाजसेवी राजेश चौधरी, ढ़िकौली से राजेंद्र की बहन अंजलि और डॉयल 100 पुलिस ने गांव करवाड़ा में डेयरी पर दबिश दी। यहां दोनों राजेंद्र और विनोद काम करते मिले। पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बंधक बनाने वाले डेयरी संचालकों के खिलाफ तहरीर दी गई है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है।