सिम से आधार को लिंक करने की अनिवार्यता ने फर्जी सिम के नेटवर्क को तोड़ दिया है। गैरकानूनी धंधे के लिए दूसरे की आईडी प्रूफ पर सिम की बिक्री बड़े पैमाने पर होती रही है। जुर्म के बड़े खिलाड़ी फर्जी सिम के दम पर रंगदारी, धमकी और अन्य अपराधों को अंजाम देते हैं। जेलों में छापे के दौरान कई बार बड़ी संख्या में फर्जी सिम मिल चुके हैं। मगर, टेलीकॉम कंपनियों ने आधार के बिना सिम जारी न करने से इस पर अंकुश लगने लगा है।
केंद्र सरकार ने मोबाइल सिम आधार कार्ड से लिंक कर दिया है। इसके लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों को पुराने सिम को लिंक करने के साथ नए सिम बिना आधार के जारी करने पर रोक लगाई गई है। आधार कार्ड से सिम के लिंक होने पर फर्जीवाड़े की कमर टूट गई है। टेलीकॉम में सिम के खेल पर रोक लगने से अपराधों पर भी अंकुश लगा है। गैरकानूनी कारोबार के लिए खूब फर्जी सिमों का प्रयोग कई बार सामने आए हैं। जिसके चलते पुलिस को भी असल मुजरिम तक पहुंच पाना कठिन रहता था। मगर, अब ऐसा नहीं है। वहीं, देहरादून, बरेली, दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से बड़ी संख्या में फर्जी सिमों का कारोबार भी बंद हो गया है। टेलीकॉम कंपनी जिस आईडी प्रूफ पर सिम जारी कर रही हैं, उसी व्यक्ति का बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान लिया जा रहा है। मोबाइल कम्युनिकेशन सेंटर के संचालन अरशद मिर्जा ने बताया कि आधार कार्ड से सिम के लिंक होने पर फर्जीवाड़े पर रोक लगी है। दूसरे लोगों की आईडी पर सिम रोक लग गई है।
पुलिस को योजना से मिली राहत
मुजफ्फरनगर। मोबाइल सिम के आधार कार्ड से लिंक होने के बाद पुलिस को बड़ी राहत मिली है। अपराधियों के मोबाइल कॉल कर रंगदारी मांगने, धमकी देने के साथ अन्य मामलों में बदमाशों तक पहुंच पाना कठिन डगर थी। फर्जी सिम के चलते कई बार असली मुजरिम बच निकलते थे। अब ऐसा नहीं है। धमकी, रंगदारी के साथ अपराधियों के मामले में पुलिस 24 घंटे के भीतर आधार कार्ड से लिंक सिम को ट्रेस करने में काफी मदद मिली है, जबकि जेल में भी फर्जी सिम के इस्तेमाल पर रोक लग गई है।
बिल जमा करने से किए हाथ खड़े
मुजफ्फरनगर। आइडिया, वोडाफोन, एयरटेल, रिलायंस आदि नामी-गिरामी मोबाइल सिम विक्रेता कंपनी पोस्टपेड बिल को बिना आधार कार्ड के जमा करने से हाथ खड़ी कर रही है। बिना आधार कार्ड दिखाए और थंब (बॉयोमेट्रिक निशान) के बिल जमा नहीं हो पा रहे हैं।