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Muzaffarnagar News: फर्जीवाड़ा कर वाहन बेचने वाले मदरसा के कारी सहित दो गिरफ्तार

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मुजफ्फरनगर/बुढ़ाना। पुलिस ने झिंझाना के गांव कोताना मदरसे के कारी मेहरबान अली सहित अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने पांच लाख रुपये, चार ट्रक, दो बाइक, आठ फर्जी आधारकार्ड, छह आरसी, एक मोबाइल व फर्जी नंबर प्लेट बरामद की हैं। दोनों आरोपी चोरी किए गए व फाइनेंस पर खरीदे गए वाहनों के इंजन व चेसिस नंबर बदल कर फर्जी कागजात के आधार पर दूसरे राज्य से पंजीकृत कराकर बेचते थे।
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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता में बताया कि बुढ़ाना पुलिस ने खतौली तिराहे पर चेकिंग के दौरान आरोपियों को एक ट्रक में जाते हुए गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने नाम मेहरबान अली उर्फ कारी व अफजाल निवासी मोहल्ला शाहघासी दरवाजा थाना झिंझाना जनपद शामली बताया।
ट्रक के कागजात चेक करने पर फर्जी पाए गए। पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर भसाना चीनी मिल के बाहर सड़क किनारे खड़े तीन अन्य ट्रक, दो बाइक व अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए। आरोपियों से पांच लाख रुपये बरामद हुए। यह रुपये ट्रक बेचने से मिले थे।
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एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार मेहरबान जनपद शामली के झिंझाना के गांव कोताना में एक मदरसे में कारी है। अफजाल फर्जी आरसी बनाने का काम करता था। दोनों मिल कर चोरी किए हुए व फाइनेंस वाले ट्रकों को खरीद कर उनके फर्जी कागजात दूसरे राज्य से बनवा कर वाहनों को पूरे दाम में बेचते थेे। आरोपियों का कहना है कि वह काफी वाहनों को बेच चुके है। वह पांच साल से यह कार्य कर रहे है।
एसएसपी ने कहा कि इस कार्य में परिवहन विभाग का भी एक कर्मचारी आरोपियों से मिला है। इसकी जांच की जा रही है। धोखाधड़ी के इस तरह के कार्य में दोनों आरोपी पहले नही पकड़े गए। मेहरबान के खिलाफ दिल्ली, करनाल व झिंझाना में विभिन्न धाराओं के चार मामले दर्ज है।
दोनों आरोपियों का चालान कर दिया गया। पुलिस को बीस हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।




ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा-
आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी आधार कार्ड तैयार करते हैं। चोरी किए हुए व फाइनेंस पर खरीदे वाहनों के इंजन व चेसिस नंबर बदलकर बाद में उनका रजिस्ट्रेशन अरुणाचल प्रदेश व अन्य राज्यों से कराकर उन्हें बेच देते हैं। वह फर्जी आधार कार्ड के माध्यम से बैंक खाते खुलवाकर लोन भी कराते हैं। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों का उपयोग वाहन पंजीकरण में करते हैं। आरसी तैयार होने के बाद, जिस वाहन की आरसी बनाई जाती है, उसी प्रकार का दूसरा वाहन खरीदकर उस पर फर्जी आरसी के अनुसार इंजन नंबर, चेसिस नंबर एवं रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित कर देते हैं। ताकि चोरी अथवा फाइनेंस वाला वाहन पकड़ में नहीं आता। इस प्रकार तैयार किए गए फर्जी आरसी एवं बदले हुए इंजन-चेसिस नंबर वाले वाहनों को असली बताकर बेच देते हैं।
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