मुजफ्फरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-03 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने 57 पेज के फैसले में लिखा कि सुनवाई में देरी, न्यायिक व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है। त्वरित न्याय से न्यायपालिका पर आमजन का भरोसा बढ़ता है। अपराधियों में कानून का भय बना रहता है। अनावश्यक देरी से साक्ष्य और गवाहों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। देरी से मिले न्याय को न्याय से अक्सर न्याय से वंचित होना माना जाता है। अपराध और सजा के बीच 15 साल का फासला व्यवस्था की कमजोरी है।
भोकरहेड़ी के राज सिंह की हत्या में फैसला सुनाते हुए अदालत ने लिखा कि न्याय व्यवस्था किसी भी लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है। न्याय में अनावश्यक देरी पीड़ित के संवैधानिक और विधिक अधिकारों को प्रभावित करता है, समाज में निराशा और असंतोष की भावना उत्पन्न करता है।
न्यायालय का यह दायित्व है कि वह अनावश्यक स्थगनों एवं विलंब से बचते हुए प्रत्येक वाद का निर्णय यथाशीघ्र करें। न्याय का वास्तविक उद्देश्य केवल निर्णय सुनाना नहीं, बल्कि ऐसा निर्णय उचित समय पर, निष्पक्षता एवं विधि के अनुरूप प्रदान करता है, जिससे समाज में विधि के शासन की प्रतिष्ठा बनी रहे। जब न्यायिक प्रक्रिया वर्षों तक खिंचती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साक्ष्य और गवाहों की स्मृति का क्षरण हो सकता है पीड़ितों को मानसिक और आर्थिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।