मुजफ्फरनगर। पुरकाजी क्षेत्र में पांच साल पहले किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी सहारनपुर निवासी को युवक को अदालत ने 10 साल कारावास की सजा सुनाई। पीड़िता ने अभियुक्त से विवाह कर लिया था और अदालत में पक्षद्रोही हो गई। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार सिद्धू फैसले में लिखा कि अपराधी और पीड़िता के मध्य विवाह हो जाना उस अपराध की गंभीरता को न तो कम कर सकता है और न ही उसे विधि सम्मत क्षमा प्रदान कर सकता है। ऐसे अपराधों को विवाह के आवरण में ढककर दंड से मुक्ति प्रदान की जाए तो यह न्याय के मूलभूत सिद्धांतों, विधि के शासन तथा महिलाओं की सुरक्षा के प्रति समाज के विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाएगा।
घर से किशोरी 20 जनवरी 2021 को संदिग्ध हालात में लापता हुई। उसके पिता ने 22 जनवरी को पुरकाजी थाने में सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के गांव निवासी और उसके पिता के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जमानत पर जेल से छूटने के बाद अभियुक्त ने पीड़िता के साथ नौ सितंबर 2023 को विवाह कर लिया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोनों की शादी का हवाला दिया। अदालत ने पॉक्सो के मामले में शादी के नाम पर राहत देने से इन्कार कर दिया।
बुधवार को दोष सिद्ध कर अभियुक्त को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा-3/4(1) के अपराध में 10 वर्ष का कठोर कारावास, आठ हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 में सात वर्ष का कारावास, चार हजार रुपये अर्थदंड, धारा 363 में पांच साल कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। दोष सिद्ध को अर्थदंड के 14 हजार रुपये पीड़िता को बतौर प्रतिकर देने होंगे।
ट्रायल के दौरान पिता की मौत हो गई, जिस कारण पिछले महीने छह जून को उसके खिलाफ कार्रवाई उपशमित कर दी गई थी।