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हरसौली का नसीम हत्याकांड

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मुजफ्फरनगर। हाईकोर्ट इलाहाबाद ने हरसौली के नसीम हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा सात लोगों को फांसी की सजा दिए जाने का फैसला बदल कर सजा आजीवन कारावास में बदल दी है। इसके साथ ही इसी घटना के क्रास केस में तीन लोगों को मिले दस वर्ष के कारावास को खत्म कर तीनों मुलजिमों को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट के निर्णय की प्रति वादी के अधिवक्ता की ओर से शनिवार को अदालत में जमा की गई। उधर, देर शाम को बरी हुए तीनों लोग जेल से रिहा हो गए।
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जनपद के थाना शाहपुर के गांव हरसौली में 25 फरवरी 2010 को खेल के मैदान में वालीबॉल खेलने को लेकर हुए विवाद में नसीम की हत्या कर दी गई थी। नसीम के तीन भाई भी घायल हुए थे। आरोपी पक्ष ने भी नसीम पक्ष के खिलाफ क्रास केस दर्ज कराया था। इस मुकदमे की सुनवाई करते हुए एडीजे राजेश भारद्वाज की कोर्ट संख्या-11 ने 20 नवंबर 2018 को नसीम हत्याकांड में सात आरोपी सरफराज पुत्र शौकत अली, शाहिद पुत्र इकबाल, अरशद पुत्र फरजूला, शादिक पुत्र इकबाल, राशिद पुत्र इस्लाम, फारूक पुत्र इस्लाम, मुमताज पुत्र इस्माईल निवासीगण हरसौली को धारा 302/149 के तहत फांसी की सजा सुनाई थी।
इसके साथ ही इस मुकदमे में फांसी की सजा पाने वाले अभियुक्त सरफराज के पिता शौकत के द्वारा दायर क्रास मुकदमे में खलील, रैयान व शाकिर को जानलेवा हमला करने का दोषी करार देते हुए धारा 307 /34 के तहत 10-10 वर्ष का कारावास की सजा सुनाई गई थी। दोनों मुकदमों के अभियुक्तों ने अपने मुकदमे की अपील हाईकोर्ट में दायर की थी। 31 जुलाई को हाईकोर्ट इलाहाबाद की जस्टिस रमेश सिंह और जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की पीठ ने अपील की सुनवाई करते हुए एडीजे-11 न्यायालय के फैसले का बदलते हुए फांसी के सभी सातों अभियुक्तों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया तथा क्रास केस में 10-10 वर्ष के कारावास के तीन मुलजिमों की सजा समाप्त करते हुए उन्हें बरी कर दिया। नसीम हत्याकांड के वादी के अधिवक्ता राजीव गोयल ने बताया कि उन्होंने शनिवार को हाईकोर्ट के निर्णय की प्रति एडीजे -11 कोर्ट में दाखिल करा दी है। उसी आधार पर शनिवार देर रात को खलील, रैयान व शाकिर जेल से रिहा हो गए हैं।
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