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कोर्ट ने दो आरोपियों को दी जमानत

Wed, 16 Dec 2015 12:42 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर में सात सितंबर 2013 में भड़के दंगे के बाद साइलेंट वार में मोहम्मदपुर रायसिंह के जंगल में तीन युवकों की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को जमानत दी है। सात आरोपी अभी भी सलाखों के पीछे हैं। तिहरे हत्याकांड पर तत्कालीन डीजीपी देवराज नागर को जिले में भेजा गया था।
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भौंराकलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर रायसिंह के जंगल में 30 अक्तूबर 2013 को संघर्ष और फायरिंग में हुसैनपुर कलां के तीन युवकों की मौत हो गई थी। दंगे के बाद साइलेंट वार में हो रही हत्याओं से कानून व्यवस्था चरमराई हुई थी। हुसैनपुर कलां के तीन युवकों अजमल, अमरोज और मेहरबान अली की हत्या के मामले को अखिलेश सरकार ने गंभीरता से लिया था। तत्कालीन डीजीपी देवराज नागर को भेजा गया था। मौजूदा हालात के मद्देनजर पुलिस ने तिहरे हत्याकांड का मुकदमा भौंराकलां थाने के बजाए बुढ़ाना कोतवाली में दर्ज कराया था।

मोहम्मद कैश ने हत्याकांड में 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इनमें गांव मोहम्मदपुर रायसिंह के राजेंद्र फौजी, सहंसरपाल, प्रवीण, हरमोर, हरेंद्र, शरणवीर, मांगेराम पुत्र सीताराम, मांगेराम पुत्र बलजोर समेत नौ आरोपियों को पुलिस ने जेल भेजा था। ये आरोपी दो साल से जेल में बंद हैं। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता ज्ञान कुमार ने बताया कि सोमवार को हाईकोर्ट इलाहाबाद की कोर्ट संख्या 47 में न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने दो आरोपियों गढ़ी नौआबाद निवासी मांगेराम पुत्र सीताराम और मोहम्मदपुर रायसिंह के मांगेराम पुत्र बलजोर की जमानत मंजूर कर ली है।
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दोबारा दंगा भड़कने की हो गई थी आशंका
मुजफ्फरनगर। दो साल पहले 30 अक्तूबर को हुई तीन हत्याओं से दोबारा दंगा भड़कने की आशंका हो गई थी। बुढ़ाना कोतवाली में हजारों लोगों की भीड़ आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमा हो गई थी। टकराव के हालात पर मेरठ से सेना को इनपुट लेना पड़ा था। तत्कालीन आईजी ब्रजभूषण का तबादला कर आगरा से आईजी आशुतोष पांडे को जिले में भेजा गया था। घटना के दिन शाम को मोहम्मदपुर रायसिंह गांव निवासी सेवानिवृत्त फौजी राजेंद्र सिंह खेत में काम करने के लिए गया था।

ईख के खेत में पहले से छिपे 10-11 हथियारबंद लोगों ने राजेंद्र को दबोच लिया और मारपीट शुरू कर दी। इस बीच दूसरे किसान ने फोन पर हमले की सूचना गांव में दे दी। कुछ ही देर में गांव के लोग और पहले से ही तैनात पीएसी के साथ जंगल की ओर दौड़ पड़े। जंगल में आमने-सामने की फायरिंग हुई, जिसमें हुसैनपुर कलां गांव के तीन युवक मारे गए थे।
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