चौधरी चरण सिंह स्पोट्स्र स्टेडियम में हुए क्रिकेट के ट्रायल विवादों में घिर गए हैं। ट्रॉयल की पूरी प्रक्रिया कटघरे में खड़ी हो गई है। स्टेडियम में खिलाड़ी मनमाने रुप से चयन करने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं, ट्रायल देने वाले खिलाड़ियों के मेडिकल टेस्ट सरकारी अस्पताल के बजाए प्राइवेट चिकित्सकों के यहां कराया गया है। साथ ही इस कार्य के लिए अवैध रुप से उगाही की गई। पूरे प्रकरण की शिकायत डीएम से की गई तो इसकी जांच शुरू हो गई है।
स्टेडियम में हर साल क्रिकेट की अनेक शाखा अंडर-14, 16, 19 और 23 के लिए खिलाड़ियों का ट्रॉयल किया जाता है। यह ट्रॉयल स्टेडियम में एक अप्रैल से प्रारंभ होता है। इस वर्ष भी ट्रॉयल किए गए हैं। जिनमें अंडर-14 के लिए 186 खिलाड़ी शामिल रहे, जबकि अंडर 16 में 232 खिलाड़ियों ने ट्रॉयल देकर अपनी प्रतिभा को दिखाया है। इसकी पूरी प्रक्रिया कटघरे में खड़ी हो गई है।
शिकायतकर्ता राकेश कुमार ने क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी, कोच से लेकर अन्य कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रॉयल के लिए फार्म भरवाने की फीस में घपला किया गया है। एक छात्र से 200 रुपये के बजाए 300 रुपये वसूल गए हैं। इस प्रक्रिया में खेल जो सामने आ रहा है, वह खिलाड़ियों की उम्र को लेकर है। मेडिकल जांच के बाद उम्र का प्रमाण-पत्र सरकारी अस्पताल से बनता है, लेकिन स्टेडियम के कुछ लोगों ने प्राइवेट चिकित्सकों के यहां से सर्टिफिकेट बनवाए गए हैं।
गलत तरीके से लिए गए ट्रॉयल और चुने गए खिलाड़ियों को लेकर डीएम राजीव शर्मा से शिकायत की गई है। इस पर डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा को जांच सौंपी है। उधर, मामले पर जिला क्रीड़ा अधिकारी प्रेम कुमार के बेतुके बोल भी सवाल खड़े कर रहे हैं। डीएसओ ने साफ कहा कि क्रिकेट एसोसिएशन उनकी नहीं सुनती, यह अपने तरीके ट्रॉयल कराती है। हालांकि उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। यदि ऐसा कुछ है तो जांच कराई जाएगी।