नगर की सब्जी मंडी में सोशल डिस्टेन्स कराती पुलिसकर्मी।
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सब्जी, राशन और दवा लेने के लिए मच गई होड़
मुजफ्फरनगर। जिले में तीन जमातियों सहित चार कोरोना पॉजिटिव केस सामने आने के बाद लोगों में खरीदारी को लेकर होड़ सी लग गई। लोग खरीदारी करते समय सोशल डिस्टेंसिंग को भी भूल गए। सब्जी, राशन और दवा की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी गई।
देशभर में चल रहे लॉकडाउन के बीच सुबह छह बजे से नौ बजे तक तीन घंटे की छूट रहती है। इस बीच लोग अपने लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। जिले में अचानक तीन जमाती और एक महिला के पॉजिटिव आ जाने से एक डर का माहौल बन गया है। पॉजिटिव केस आ जाने के बाद बृहस्पतिवार सुबह के समय लोगों में सब्जी, दाल आदि आदि की खरीदारी को लेकर काफी भीड़ रही। लोग राशन खरीदने को लेकर भी उतावले देखे गए। सब्जी मंडी में लोग एक सप्ताह से 15 दिन तक की सब्जी एक साथ खरीदते देखे गए। लॉकडाउन बढ़ न जाए इसे लेकर भी राशन खरीदकर लोग तैयारी करते दिखाई दिए। शहर की दाल मंडी की दुकानों पर भी सुबह के समय भीड़ लगी रही। मेडिकल स्टोर पर भी लोग सिरदर्द, बुखार आदि की दवा अपने घर पर रखने के लिए खरीदते नजर आए, जो लोग बीमार है, उनके लिए एकत्र दवा खरीदने को लोग आतुर दिखाई दिए। पॉजिटिव केस आने से लोगों की यहां लॉक डाउन खुलने की उम्मीद भी जाती दिखाई दे रही है। शिवचौक स्थित सब्जी मंडी में अधिक भीड़ के चलते पुलिस को व्यवस्था बनानी पड़ी। पुलिस प्रशासन ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने पर लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन का मानना है कि लाकडाउन का पालन कराकर ही लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाया जा सकता है।
जिला परिषद मार्केट में भारी भीड़
मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर दवा का सबसे बड़ा बाजार है। यहां जिला परिषद मार्केट और अग्रवाल मार्केट में दवा की थोक विक्रेताओं की दुकानें है। दवा बाजार प्रशासन के आदेश के चलते दोपहर 12 बजे से चार बजे तक खुल रहा है। यहां की मार्केट में दवा खरीदने के लिए जिले के देहात के अलावा, शामली, सहारनपुर, हरिद्वार आदि तक के शहरों के लोग आते हैं। सामान्य स्थिति में देहरादून आदि तक के लोग भी यहां आते हैं। बृहस्पतिवार को जिला परिषद मार्केट में दवा खरीदने आने वालों की भारी भीड़ रही। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि खरीदारों के वाहनों की कतार कलक्ट्रेट के गेट से लेकर झांसी की रानी तक लगी थी। इनमें चौपहिया और दुपहिया वाहनों की संख्या अधिक थी। दवा को लेकर मेडिकल स्टोरों पर कोई कमी न रहे इसे लेकर मेडिकल स्टोर संचालक आवश्यकता से भी अधिक दवा खरीदकर ले जा रहे हैं।