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शासन तक पहुंचा सिटी मजिस्ट्रेट-चेयरपर्सन विवाद

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शासन तक पहुंचा सिटी मजिस्ट्रेट-चेयरपर्सन विवाद
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मुजफ्फरनगर। सोमवार को नगर पालिका के निरीक्षण को पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार और नगर पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के बीच हुआ विवाद शासन तक पहुंच गया है। दोनों ने ही अपना पक्ष रखते हुए शासन को पत्र लिखा है। माना जा रहा है कि इस प्रकरण में जल्द ही कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
सिटी मजिस्ट्रेट सोमवार को नगर पालिका पहुंचे थे। वह 14वें वित्त की धनराशि से हो रहे कार्यों के अतिरिक्त अन्य कई बिंदुओं को लेकर जांच कर रहे थे। लेखाकार से कैश बुक एवं चेक बुक मांगने पर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल भी नगर पालिका पहुंच गईं। चेयरपर्सन ने सिटी मजिस्ट्रेट पर नगर पालिका के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए। इसे लेकर दोनों में काफी नोकझोंक भी हुई थी। पालिकाध्यक्ष ने उन पर कमीशनखोरी को बढ़ावा देने तक के आरोप लगा दिए थे।
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वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार का कहना है कि वह नगर पालिका की शिकायतों की जांच कर रहे हैं। इस सिलसिले में नगर पालिका गए थे। चेयरपर्सन ने बिना एकाउंटेंट के हस्ताक्षर किए ही भुगतान के लिए अपने हस्ताक्षर कर रखे थे। सिटी मजिस्ट्रेट और चेयरपर्सन के बीच हुआ यह विवाद मंगलवार को सुर्खियों में रहा। दोनों ओर से इस संबंध में शासन को पत्र लिख दिए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम से शासन को अवगत करा दिया है। जो भी हुआ वह गलत था। शासन को पूरी रिपोर्ट दी गई है। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने सोमवार को ही पूरे मामले से डीएम, कमिश्नर और शासन के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। सभी को पत्र भेजे गए हैं।
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रकम लैप्स होने से बचाने की जुगत में लगे रहे अफसर
मुजफ्फरनगर। 14वें वित्त की धनराशि को लैप्स होने से बचाने के लिए दिन भर नगर पालिका के अधिकारी माथापच्ची करते रहे। 31 दिसंबर की रात्रि 12 बजे तक ही इस धनराशि का भुगतान किया जा सकता था। नगर पालिका में 14वें वित्त की धनराशि से कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों को पूरा करा 31 दिसंबर तक भुगतान होना था। नगर पालिका के एई जयवीर सिंह का कहना है कि जो कार्य चल रहे थे वे लगभग पूरे हो गए हैं। करीब 70-80 कार्य हैं। ठेकेदारों ने बिल भी जमा करा दिए हैं। इसके लिए भुगतान की कोशिशें हो रही हैं। भुगतान के लिए रात्रि 12 बजे तक का समय है। वहीं, ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि यदि कुछ धनराशि बचती है तो शासन से उसके उपभोग की स्वीकृति ली जाएगी। सीएए बवाल के दौरान भी शहर में काम बंद रहे हैं। शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी। धनराशि खर्च करने की अनुमति लेने का प्रयास किया जाएगा।
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