इटावा गांव में जर्जर हालत में चौपाल गिरने की कगार पर
बुढ़ाना। गरीबों के शादी-विवाह एवं मेहमानों के लिए इटावा गांव में बनी चौपाल गिरने की कगार पर है। जर्जर हालत में हुई चौपाल में ग्रामीण जाने से डरने लगे हैं। बस्ती के ग्रामीणों ने चौपाल में प्रदर्शन कर जिलाधिकारी से चौपाल बनवाने की मांग उठाई। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव इटावा में वर्ष 1997 में बस्ती के बीच चौपाल का निर्माण हुआ था। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रभात कुमार ने 15 अगस्त 1997 को इस चौपाल का उद्घाटन किया था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के गरीबों व अनुसूचित जाति की शादी-विवाह में बरात आदि व मेहमानों के लिए इस चौपाल का प्रयोग होता था। गांव के गरीब व्यक्ति अपने मेहमानों को इसी चौपाल में ठहराते थे। मरम्मत व रखरखाव के अभाव में यह चौपाल जर्जर हालत में हो गई है। चौपाल के निर्माण के बाद से आज तक किसी भी ग्राम प्रधान ने इसकी मरम्मत नहीं करवाई। ग्रामीणों ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियां उनकी वोट तो लेती है, सुविधाएं नही देती। जर्जर हालत में हो चुकी चौपाल गिरने की कगार पर है। चौपाल के दोबारा निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। चौपाल के निर्माण की मांग को लेकर गांव वालों ने अपना हस्ताक्षरित ज्ञापन जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री को भेजकर चौपाल के दोबारा निर्माण की मांग की। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों में प्रवीण कुमार, ओमबीर, गंगा, रिषी, सुरेशपाल, ओमपाल, लटूर, लक्ष्मण व पाल्ला आदि ग्रामीण मौजूद रहे।