योग शिविर में शहीदों की आरती करते अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के योग शिविर में क्रांति गुरु चंद्रमोहन जी ने योग का शारीरिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व भी बताया। योग कराने के दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमें अपने देश और संतान की सुरक्षा एवं भविष्य के प्रति चिंतनशील रहना होगा, इसके लिए जाति रहित एकजुटता जरूरी है।
क्रांतिकारी गुरु चंद्रमोहन जी ने योग का महत्व बनाते हुए कहा कि यम और नियम को धारण करने पर ही आसन और प्राणायाम सफल होते हैं। यम का अर्थ है, जाति रहित होना, क्योंकि जाति से ही जातिवाद, क्षेत्रवाद, पूंजीवाद, संप्रदायवाद रूपी दानव पैदा होते हैं। नियम का अर्थ है सफाई।
अर्थात शरीर की, अपने घर की, आस पड़ोस की सफाई के प्रति जागरूकता। अगर तुम खड़े हो, बैठे हो या लेटे हो वही आसन बन जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राणायाम का अर्थ है श्वांसों से शरीर के अंदर विराजमान शांति और स्वास्थ्य को प्राप्त करना। इन चारों को धारण करने से मनुष्य मानवतावादी बनना शुरू हो जाता है। अंत में उन्होंने देश और समाज में जाति रहित एकजुटता का आह्वान किया।