मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का मूल्यांकन पूर्ण करना जिले में चुनौती बना हुआ है। कापियों का बोझ केंद्रों पर अधिक है, लेकिन जांचने वालों को टोटा बना है। इसको लेकर परेशानी बढ़ गई है। हालांकि मूल्यांकन का कार्य करीब 50 से 60 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। ऐसे में शेष बचे चार दिन में मूल्यांकन पूरा करने को कड़ी मशक्कत प्रारंभ हो गई है।
प्रदेश सरकार ने 31 मार्च तक हर हाल में मूल्यांकन कार्य पूर्ण करने के आदेश दिए हैं। इसको लेकर जिले में भी चार मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर कार्य चल रहा है। इस बार वित्तविहीन शिक्षकों की हड़ताल के कारण स्थिति अधिक बिगड़ गई है। प्रत्येक केंद्र पर परीक्षकों का टोटा बरकरार है। हालात ऐसे हैं कि इंग्लिश, समाज शास्त्र, हिंदी आदि के परीक्षक अधिक समस्या बनी है। इन विषयों की कापियों को बोझ केंद्रों पर ज्यादा है।
विभाग को करीब इंग्लिश में 40 परीक्षक, हिंदी में 10, समाजशास्त्र में 8 और हिंदी में 12 की जरूरत है। इनके बिना मूल्यांकन कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। जोरआजमाइश के बाद विभाग करीब 60 प्रतिशत तक मूल्यांकन कार्य निपटा सका है। बाकी चार दिन में कहीं 30, 40 प्रतिशत मूल्यांकन होना है।
मूल्यांकन प्रभारी जीआईसी प्राचार्य रमेशचंद शर्मा ने बताया कि इस बार मूल्यांकन में बाधाएं परीक्षकों की कमी के कारण आ रही है। केंद्रों पर कापियों को जांचने वाले कम है। डीएवी केंद्र के प्रभारी प्रधानाचार्य शिवकुमार यादव ने बताया कि केंद्र पर करीब 70 प्रतिशत तक कार्य हो गया है, लेकिन इंग्लिश विषय के परीक्षक कम है। इसको लेकर विभाग को सूचना दी गई है।