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आग बुझाने से पहले पानी की चुनौती

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आग बुझाने से पहले पानी भरने की चुनौती
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मुजफ्फरनगर। बरसों से सीमित संसाधनों के जरिये अग्निकांड से जूझ रहे जिला अग्निशमन विभाग के समक्ष स्टाफ की कमी की ही नहीं, आग बुझाने से पहले पानी भरने की भी चुनौती है। शहर क्षेत्र के अधिकांश हाइड्रेंट पंप घनी आबादी में दफन हो चुके हैं तो नलकूप भी सीमित ही रह गए हैं।
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जनपद का अग्निशमन विभाग एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रहा है। बेहद सीमित संसाधनों के चलते अग्निकांड की घटनाओं पर काबू पाने के लिए विभाग को कई मोर्चों पर जूझना पड़ता है। इसमें स्टाफ की कमी के साथ ही शहरी क्षेत्र में हाइड्रेंट पंप व नलकूपों की कमी होना सबसे अहम है। शहरी क्षेत्र में हाइड्रेंट पंप लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं। सभी हाइड्रेंट पंप सड़कों के नीचे दब चुके हैं या फिर घनी आबादी के बीच आकर अप्रासंगिक हो चुके हैं। जनपद की बात करें तो अग्निशमन विभाग के पास केवल 11 हाइड्रेंट पंप और सात नलकूप ही शेष रह गए हैं। इन गिनती के हाइड्रेंट पंप और नलकूपों के बल पर अग्निकांड पर काबू पाने के लिए पानी उपलब्ध कर पूरे जनपद की पूर्ति हो पाना लगभग असंभव है। एफएसओ ऋषभ पंवार के अनुसार गिनती के हाइड्रेंट पंप व नलकूप होने के चलते आग पर काबू पाने के लिए पानी संकलित करने की खातिर नजदीकी स्कूल-कॉलेज, नगरपालिका या नगर पंचायतों अथवा होटलों के पंपों और वाटर टैंकों का सहारा लेना पड़ता है। इसके चलते समय से आग की घटनाओं पर काबू पाना बड़ी चुनौती बन जाता है।
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