श्री गुरु सिंह सभा के तत्वावधान में वैशाखी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। गुरु ग्रंथ साहिब पाठ के समापन पर दीवान सजाए गए। इस अवसर पर गुरु गोबिंद सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उन्होंने जुल्म और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कृपाण उठाई थी। श्री गुरु सिंह सभा गांधी कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में कविशर जत्था भाई रणजीत सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह के खालसा पद की स्थापना का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
बताया कि वैशाखी के दिन ही गुरु महाराज ने 1699 में खालसा पंथ की नींव रखी थी। खालसा का अर्थ खालिस शब्द से है। उनका लक्ष्य लोगों को मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था। 12 अप्रैल से शुरू हुए गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ का समापन होने पर दीवान सजाए गए। ज्ञानी जोगा सिंह एवं ज्ञानी हरजीत सिंह ने कथा से संगत को निहाल किया। संचालन करते हुए ज्ञानी हरजीत सिंह ने बताया कि 17 अप्रैल की रात्रि से 20 अप्रैल तक ज्ञानी हरभजन सिंह खालसा आनंदपुर साहिब वाले गुरमत कथा करेंगे।
21 अप्रैल को सवेरे दस बजे गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में अमृत संचार कराया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान गुरु सिंह सभा की नई कमेटी ने अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। सरदार अमरजीत सिंह सिडाना को प्रधान, धनप्रीत सिंह चन्नी बेटी को महासचिव, गुरु गोबिंद सिंह स्कूल के प्रबंधक के रूप में हरजीत सिंह गुराया को चुना गया।
कार्यक्रम में सुखदर्शन सिंह बेदी, विरेंद्र सिंह हनी सेखो, वजीर सिंह राजा, सुरजीत सिंह, प्रभजोत सिंह, तरजिंदर सिंह, जितेंद्र पाल सिंह जत्थेदार मिंटू सिंह, वजीर सिंह ग्रोवर, इंद्रजीत सिंह सेखो, चरणजीत सिंह कोहली, देवेंद्र सिंह नागपाल, सुखमंदर सिंह, डा. उजागर सिंह सलूजा, मोहन सिंह सिडाना, सुखबीर सिंह रावल, देवेंद्र पाल सिंह चड्ढा, कश्मीर सिंह चहल, जितेंद्र पाल सिंह सिडाना, गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह खुराना आदि का सहयोग रहा।