गुरु तेगबहादुर का बलिदान दिवस मनाया
मुजफ्फरनगर। लाला जगदीश प्रसाद इंटर कॉलेज में गुरु तेगबहादुर का बलिदान दिवस मनाया गया। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने गुरु तेगबहादुर के जीवन पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य सतीश उपाध्याय ने मां शारदा और गुरु तेग बहादुर जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर पुष्पार्चन के साथ किया। प्रधानाचार्य सतीश उपाध्याय ने कहा कि गुरुतेग बहादुर जैसे महापुरुष का जीवनवृत्त हमारे अंदर राष्ट्र प्रेम और देशभक्ति की भावना को जागृत करता है। हमें उनके जीवन से प्रेरित होकर देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने वालों में गुरु तेग़ बहादुर का स्थान अद्वितीय है। मुख्य वक्ता उमेश सारस्वत ने कहा कि गुरु तेग़ बहादुर का जन्म एक अप्रैल 1621 को अमृतसर में हुआ था। इनके पिता का नाम हरगोविंद सिंह था और माता का नाम गुजरी देवी था। ये सिखों के नौवें गुरु थे। उनके द्वारा रचित 115 पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं। मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा। हालांकि गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम कबूल नहीं किया, तब 24 नवंबर 1675 को औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर का शीश कटवा दिया था। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं।