रोहताश पर घोषित हुआ था एक लाख का इनाम
रिया हत्याकांड में नामजद रोहताश काफी दिनों तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका, जिस पर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित किया था। उसे कोर्ट से भी भगोड़ा घोषित किया गया था। जांच जब सीबीआई पर आई तो सीबीआई भी उसकी तलाश में जुटी रही, मगर वह हाथ नहीं लग सका, तब सीबीआई की ओर से उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
वर्ष 2016 में एसटीएफ नोएडा ने रोहताश को नोएडा के नोजल पार्क थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने बताया था कि रोहताश बर्खास्त सिपाही चंद्रपाल (रिया का ताऊ) की हत्या करने आया था, तभी से रोहताश जेल में बंद है। उधर, कोर्ट की सुनवाई के दौरान 2017 में सुनील को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी। बुधवार को वह कोर्ट में पेश हुआ। कोर्ट द्वारा तीनों भाइयों को दोषी करार दिए जाने पर सुनील को भी न्यायिक हिरासत में फिर से जेल भेज दिया गया।
मरणोपरांत मिले थे कई पुरस्कार
मुंडभर गांव की बहादुर बेटी रिया की हत्या का मामला देश भर में चर्चा का विषय बना तो केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान रिया के बलिदान पर गया। उसे मरणोपरांत कई पुरस्कार दिए गए। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उसे बाल वीरता पुरस्कार दिया।
रिया की मां अनीता और पिता सुरेशपाल ने 26 जनवरी 2015 को यह पुरस्कार लिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने उसके माता पिता को बापू जयधानी अवार्ड दिया। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने भी उसे रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड दिया। 2016 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ की ओर से उसे जीवन रक्षक पदक दिया गया। बनानी ग्रुप ने भी उसे वीरता पुरस्कार दिया था।
हत्यारों को मिले फांसी की सजा
बुधवार को कोर्ट का फैसला सुनने के लिए रिया के पिता सुरेशपाल, ताऊ नरेश कुमार समेत अन्य परिजन कचहरी में ही रहे। गमगीन पिता सुरेशपाल ने कहां कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि रिया का न्याय मिलेगा। उसने कहा कि रिया के हत्यारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। वैसे कोर्ट का जो भी फैसला होगा, हमें मंजूर है। उधर, दोषी ठहराए गए तीनों गुनहगारों रोहताश, सुनील और ललित के परिजन भी यहां पहुंचे। तीनों भाइयों की मां राजवीरी, बहन राखी और बहनोई संजीव कोर्ट के निर्णय के दौरान अदालत के बाहर बैठे थे। उन्होंने कोर्ट फैसलेे पर कोई भी बात कहने से इंकार कर दिया।
कोर्ट में दो माह लगातार हुई सुनवाई
एडीजे प्रथम वीर नायक सिंह की अदालत में बीते दो माह से रिया हत्याकांड की लगातार सुनवाई हुई। एडीजीसी जितेंद्र त्यागी, आशीष त्यागी और वादी के अधिवक्ता सतेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले की सुनवाई तीन जून को पूरी हो गई थी। सीबीआई स्पेशन क्राइम ब्रांच तृतीय के लोक अभियोजन अधिकारी दर्शन सिंह और अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 20 गवाह कोर्ट में पेश किए गए।
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