जिला सहकारी बैंक में संचालक पद के नामांकन पत्रों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने 20 नामांकन निरस्त कर दिए हैं। नामांकन निरस्त करने पर प्रत्याशियों ने बैंक के बाहर जमकर हंगामा किया और अफसरों पर बिना गलती के नामांकन निरस्त करने के आरोप लगाए। अब नौ संचालकों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। एससी सीट के सभी पांच पर्चे निरस्त होने से यह खाली रह गई है। बुढ़ाना पर कोई नामांकन नहीं आने से खाली है। अब तीन संचालकों के लिए चुनाव होगा।
जिला सहकारी बैंक के चुनाव प्रक्रिया के दूसरे दिन शुक्रवार को नामांकन पत्रों की जांच में निर्वाचन अधिकारी एसडीएम खतौली अतुल कुमार और सहायक निर्वाचन अधिकारी नीरज शर्मा ने विभिन्न कारणों से 20 नामांकन पत्र निरस्त कर दिए। नामांकन निरस्त से पहले दिन भर सहकारी बैंक परिसर में गहमागहमी रही।
चुनाव से जुडे़ अफसर तनाव में दिखे। नामांकन निरस्त करने की सूचना और किस निर्वाचन क्षेत्र में कितने प्रत्याशी इसकी लिस्ट देर शाम जाकर प्रकाशित की गई। भाजपा के चेयरमैन पद के घोषित प्रत्याशी सत्यपाल पाल निर्विरोध संचालक निर्वाचित हो गए हैं। उनके साथ ही उद्यमी सुभाष चौधरी भी संचालक चुने गए हैं।
इनके सामने मछला देवी, नरेंद्र सिंह और सत्यपाल नर्सरी का नामांकन निरस्त हो गया। जानसठ से पूर्व ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र सिंह भी निर्विरोध संचालक निर्वाचित हो गए। उनके सामने चुनाव लड़ने वाले पूर्व चेयरमैन ब्रहमसिंह और अन्य के नामांकन निरस्त हो गए हैं। ऊन में कैलाश मलिक और सोमवीर सिंह संचालक हो गए हैं।
कांधला से नीरज मलिक निर्विरोध संचालक बन गए हैं। विशेष योग्यता में तीन संचालक निर्विरोध बने हैं। इनमें योगेश, मुकेश जैन, दिनेश बालियान संचालक बने। एससी सीट के लिए पांच नामांकन आए थे। इन सभी का नामांकन निरस्त हो गया। निरस्त होने वालों में विधायक प्रमोद ऊंटवाल के बेटे रोहित का नामांकन भी शामिल है।
अब संचालक के तीन पदों के लिए चुनाव होगा। इनमें बघरा में इंद्रपाल, दल सिंह वर्मा, प्रवीण मलिक, संदीप मलिक चुुनाव मैदान में है। पुरकाजी में सात प्रत्याशी है, जिनमें अंजुम अब्बास, ईलम सिंह, प्रकाशवीर, मीरा, राजवीर, सोमपाल, सुमित शामिल है। खतौली में उर्मि सिंह, कृष्णादेवी, सुशीला मैदान में है।
अफसरों में दिखी हड़बड़ाहट
मुजफ्फरनगर। नामांकन निरस्त से पहले निर्वाचन अधिकारी एसडीएम खतौली अतुल कुमार और सहायक निर्वाचन अधिकारी नीरज शर्मा तनाव और हड़बडाहट में नजर आए। ये अधिकारी शाम तक असमंजस की स्थिति में रहे। यदि इनसे कोई जानकारी लेने पहुंचा तो सही उत्तर नहीं दे सके। कई बार ये ऑफिस से बाहर निकले और फिर वापस आए। सूची जाकर शाम को जारी की। सूची चस्पा करने के बाद इन अधिकारियों ने अपने सरकारी नंबर भी स्वीच ऑफ कर लिए।
सत्ता के दबाव में नामांकन निरस्त हुए कोर्ट जाएंगे
मुजफ्फरनगर। जिले में सहकारिता की राजनीति कर रहे कई धुरंधरों के नामांकन निरस्त कर उन्हें बिना लड़े मैदान से बाहर कर दिया। ऐसे ही पूर्व चेयरमैन ब्रहम सिंह ने आरोप लगाया कि जानसठ में वीरेंद्र सिंह को जिताने के लिए प्रशासन ने उनका नामांकन निरस्त किया।
इस निर्णय के विरोध में कोर्ट जाएंगे। सदर से मछला देवी का नामांकन निरस्त होने पर उनके पति ठाकुर वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि बिना कमी के नामांकन पत्र निरस्त किए गए हैं। इसके विरोध में अदालत में अपना पक्ष रखेंगे।
भाजपा के प्रत्याशी रहेंगे सत्यपाल पाल
मुजफ्फरनगर। भाजपा ने जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन पद के लिए पूर्व जिलाध्यक्ष सत्यपाल पाल का नाम घोषित किया है। संचालक पद पर निर्विरोध जीत से उनके चेयरमैन बनने की संभावना बन गई है। वहीं भाजपा के कुछ नेता उन्हें आंतरिक रुप से पटखनी देने में लगे थे, लेकिन संगठन के सीधे हस्तक्षेप से उनकी ताजपोशी को निश्चित माना जा रहा है।
मलिक के बाद ऊंटवाल को भी सबक
मुजफ्फरनगर। भाजपा विधायक सभी पद अपनों को देने की तैयारी में लगे हैं। इन नेताओं पर संगठन ने अब तिरछी नजर कर ली है। संगठन ने साफ कर दिया है कि किसी विधायक और सांसद के परिवार को दूसरा पद नहीं दिया जाएगा। भाजपा कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा।
यही कारण रहा कि एक दिन पहले जहां प्रदेश संगठन ने संचालक के पद पर बुढाना से विधायक उमेश मलिक की पत्नी इंद्ररेखा मलिक को नामांकन करने से रोक दिया, वहीं दूसरे दिन विधायक प्रमोद ऊंटवाल के बेटे रोहित का नामांकन निरस्त हो गया। संगठन की बिना मर्जी के ऊंटवाल ने एससी सीट से नामांकन करा दिया था।