मुजफ्फरनगर। ऐसे लोग जिनके पास अपने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए शेड नहीं है, उन्हें मनरेगा से व्यक्तिगत आश्रय स्थल बनाकर दिए जा रहे हैं। शर्त यह है कि अपने पशुओं के साथ लाभार्थी को एक गोवंश सामुदायिक आश्रय स्थल से लेकर उसकी देखभाल करनी होगी।
निराश्रित गोवंश के लिए जिले में सामुदायिक स्थायी एवं अस्थायी गोआश्रय स्थल बने हुए हैं। जनपद में 26 आश्रय स्थलों में 1139 पशु रखे हैं। इसके बावजूद बड़ी तादाद में गोवंश निराश्रित घूम रहे हैं। शासन ने पशुपालकों की आय बढ़ाने तथा निराश्रित गोवंश को आश्रय देने के लिए व्यक्तिगत गोआश्रय स्थल निर्माण की भी योजना शुरू की है। यदि किसी पशुपालक के पास अपने पशुओं को रखने के लिए शेड नहीं है तो मनरेगा से शेड का निर्माण कराया जा रहा है। शेड में पशुओं के चारा खाने के लिए स्थान (खोर) का भी निर्माण होगा। पीडी डीआरडीए जय सिंह यादव ने बताया कि संबंधित लाभार्थी को अपने पशुओं के साथ एक गोवंश सामुदायिक आश्रय स्थल से भी गोद लेकर उसकी परवरिश करनी होगी।
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190 आश्रय स्थलों पर हो रहा काम
इस योजना के तहत गरीब पशुपालकों का चयन किया जाना है। एपीओ मनरेगा ओंकारनाथ ने बताया कि 190 आश्रय स्थलों के निर्माण का काम हो रहा है। इनमें से 62 पूरे हो गए हैं बाकी जल्द पूरे हो जाएंगे। इन आश्रय स्थलों में 124 निराश्रित पशुओं को रखा गया है।
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पशुओं की संख्या के हिसाब से लागत
व्यक्तिगत गोआश्रय स्थल की लागत पशुओं की संख्या के हिसाब से निर्धारित है। दो पशुओं को रखने के लिए आश्रय स्थल बनाने में करीब 60 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इससे ज्यादा पशुओं पर खर्च बढ़ जाता है।