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बुढ़ाना विधानसभा : जाट मतों के बंटवारे पर टिका जीत का गणित

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मुजफ्फरनगर। किसान आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही बुढ़ाना विधानसभा के नतीजों पर सबकी निगाह रहेगी। सियासी चर्चाओं में सबके अपने-अपने दावे हैं। लेकिन इस बार यहां जाट वोटों के बंटवारे पर हार-जीत तय होगी। देखने वाली बात यह होगी कि किसके हिस्से में कितने जाट मत आए हैं।
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बुढ़ाना विधानसभा के नतीजों को लेकर सबका अपना गणित है। कोई मुस्लिम मतों के प्रतिशत का आंकलन कर रहा है तो अति पिछड़ा वर्ग के वोटों की गिनती में जुटा है। समर्थकों का दावा है कि जीत हार का अंतर यहां बड़ा होगा। लेकिन अब तक जो रुझान आ रहे हैं, उनसे स्थिति नजदीकी मुकाबले की बन रही है। मुस्लिमों के बाद सबसे बड़ी संख्या में जाटों के वोट इस विधानसभा में है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि जाट मतों का कितना ध्रुवीकरण भाजपा अपने हिस्से में कर सकी है। जाट मतों में अगर बिखराव अधिक हुआ तो गठबंधन की राह मुश्किल हो जाएगी। समर्थकों का अपना गणित है।
महिला और पुरुषों ने इस तरह किया मतदान
बुढ़ाना विधानसभा सीट पर एक लाख 36 हजार 897 पुरुषों ने मतदान किया है। जबकि एक लाख 17 हजार 391 महिलाओं ने वोट डाले। कुल दो लाख 54 हजार 288 वोट पड़े हैं। साल 2017 के चुनाव में भाजपा के उमेश मलिक का सपा के प्रमोद त्यागी से मुकाबला हुआ था। बसपा से पूर्व सांसद कादिर राना की पत्नी भी मैदान में थी।
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जाट और मुस्लिम सबसे ज्यादा
सीट पर जाट और मुस्लिम सबसे ज्यादा संख्या में है। दलित-मुस्लिम या जाट-मुस्लिम समीकरण यहां निर्णायक स्थिति बनाता है। यह जिले की सबसे बड़ी विधानसभा है। किसान आंदोलन के कारण बुढ़ाना सीट सबसे ज्यादा खास बन गई है। चुनाव के दौरान भी किसान आंदोलन का असर खूब दिखा। हालांकि मतदान के दिन इस क्षेत्र में खूब शांति रही।
गठवाला खाप की इस बार अहम भूमिका
बुढ़ाना क्षेत्र की सियासत के जानकारों का आंकलन है कि इस बार गठवाला खाप के कई गांव निर्णायक भूमिका अदा करेंगे। इनमें खरड़, फुगाना, डूंगर, मोहम्मदपुर समेत अन्य गांव भी है। हालांकि बालियान खाप के सिसौली में हुए मतदान और नतीजों पर सबकी निगाह भी लगी हुई है।
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