भारत बंद के दौरान नई मंडी कोतवाली पर अराजक तत्वों के हमले और आगजनी के मामले में बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष कमल गौतम की गिरफ्तारी से बसपा में उबाल है। शुक्रवार को बसपा नेताओं ने एसएसपी अनंत देव से मुलाकात कर इस कार्रवाई के प्रति रोष जताते हुए निष्पक्ष जांच कराने और बसपा जिलाध्यक्ष की रिहाई कराने की मांग की। भाजपा पर रंजिश में कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
पुलिस ने बृहस्पतिवार रात बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम को गिरफ्तार कर शुक्रवार को जेल भेज दिया। उन पर दलित समाज के लोगों को भड़काने का आरोप है। जिलाध्यक्ष की गिरफ्तारी से पूरी पार्टी में रोष है। शुक्रवार को बसपा नेता पूर्व सांसद राजपाल सैनी, पूर्व सांसद कादिर राणा, पूर्व विधायक नूर सलीम राना के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता एसएसपी से मिलने पहुंचे। इन लोगों ने कमल गौतम की गिरफ्तारी का विरोध किया।
कार्रवाई को राजनीतिक विद्वेष बताया। कहा कि दलित समाज के प्रदर्शन में बसपा के जो भी नेता थे, तोड़फोड़ और उपद्रव में कोई शामिल नहीं है। दलित समाज का प्रदर्शन था, लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार सबकों है। प्रदर्शन में शामिल होने के नाम पर जिलाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई किया जाना पूरी तरह गलत है। बसपा नेताओं ने एसएसपी से कहा कि वह प्रदर्शन को सियासी मोड़ न दें।
इन नेताओं ने पुलिस पर भाजपा के एजेंट के रुप में काम करने का आरोप लगाया। कमल गौतम के खिलाफ पुलिस के पास सबूत हैं तो वो सार्वजनिक करें, ताकि जनता को भी पुलिस के सच और झूठ का पता चल सके। बसपा किसी भी सूरत में उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेगी।
हम किसी भी हिंसा के पक्षधर नहीं है, लेकिन निर्दोषों का उत्पीड़न किसी भी कार्रवाई के नाम पर होने नहीं दिया जाएगा। एसएसपी ने आश्वासन दिया कि किसी निर्दोष का उत्पीड़न नहीं होगा। इस अवसर पर नेताओं के साथ पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिवास पाल, श्यामलाल प्रजापति, चांद सिंह कश्यप, सतप्रकाश आदि शामिल रहे।
पुलिस के खिलाफ बोलना तो नहीं पड़ा भारी
मुजफ्फरनगर। बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम ने बृहस्पतिवार को गांव गादला में अमरेश की शोकसभा में उसकी मौत के लिए पुलिस को जिम्मदार ठहराया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पुलिस उपद्रव के नाम पर दलित समाज के निर्दोष युवकों का उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने संगठन की ओर से पुलिस उत्पीड़न का विरोध करने की बात कही थी।
दो दिन पहले ही मिली थी बागडौर
मुजफ्फरनगर। कमल गौतम को बसपा जिलाध्यक्ष की बागडोर दो दिन पहले ही मिली थी। बसपा प्रमुख मायावती ने प्रेमचंद गौतम के स्थान पर उन्हें जिलाध्यक्ष मनोनीत किया था। कमल गौतम इससे पहले भी पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे। उनकी गिरफ्तारी जिले में सियासी उबाल ला सकती है।