दलितों की गोलबंदी पर संघ ने बदली रणनीति
मुजफ्फरनगर।
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के मुद्दे पर फैले दलित आक्रोश के बाद संघ और भाजपा की बैठक में मौजूदा हालात पर नई रणनीति बनाई गई। गोपनीय तरीके से गाजियाबाद में जुटे भाजपाइयों को दलित मुद्दे पर फूंक-फूंककर कदम उठाने का पाठ पढ़ाया गया। भाजपा उपद्रव को लेकर सियासी नफे-नुकसान के मंथन के साथ विपक्षी पार्टियों को कोई मौका नहीं देना चाहती है।
दलित मुद्दे पर आरएसएस ने भाजपा के लिए नई गाइड लाइन दी है। दो अप्रैल को मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के बाद संघ चिंतित है। एससी-एसटी एक्ट के मसले पर दलितों में ऐसे आक्रोश की उम्मीद भाजपा को नहीं थी। बसपा, सपा और कांग्रेस ने बदली परिस्थितियों में दलित राजनीति पर फोकस बढ़ा दिया। भाजपा के लिए नई रणनीति बनाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी को कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा में उपचुनाव लड़ना है। गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट पर मिली हार के बाद विपक्षी पार्टियों के हौसले मजबूत हैं। ऐसे में अन्य दल दलितों को अपने पक्ष में लामबंद करना चाहते हैं। संघ की निगाहें आगामी लोकसभा चुनाव के अनुकूल माहौल बनाने पर टिकी है। उपद्रव और हिंसा के बाद भाजपा की चुप्पी से साफ संकेत है कि पार्टी दलितों के बीच अपने रुख को नरम रख रही है। आरएसएस के क्षेत्रीय संयोजक सूर्य प्रकाश टांक, क्षेत्र प्रचारक आलोक, प्रांत संघ चालक मनवीर सिंह ने संघ के नए दिशा-निर्देशों से भाजपाइयों को अवगत करा दिया है। उपद्रव के बाद माहौल को शांत करने और दलितों से स्नेह का संवाद करने का पाठ सिखाया गया है। कोई ऐसी बात या कदम न उठाया जाए, जिससे विपक्षी पार्टियों को अंगुली उठाने का मौका मिले। साथ ही कार्रवाई के नाम पर दलितों का कोई उत्पीड़न नहीं होने दिया जाए। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद तत्कालीन सपा सरकार ने जिस तरह बड़े पैमाने पर फर्जी नामजदगी कर गिरफ्तारी का गांव-गांव विरोध हुआ था, उस बात को यादकर भी भाजपा कोई मौका दलितों को एकजुट होने का नहीं देना चाहती है। संघ की बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार के पश्चिम के सभी मंत्रियों के अलावा सांसद और विधायक मौजूद थे।
आंबेडकर जयंती को लेकर बड़ी तैयारियां
मुजफ्फरनगर। संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल के कार्यक्रम को लेकर सभी पार्टियां तैयारी कर रही हैं। दलित आंदोलन के मद्देनजर सपा जिला मुख्यालय पर आंबेडकर जन्म दिवस मनाएगी, वहीं बसपा, कांग्रेस और रालोद ने प्रोग्राम तय कर दिए हैं। भाजपा भी दलित मसीहा को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी तैयारी में है। जयंती पर दलित संगठनों की एकजुटता पर भी सियासी निगाहें टिकी हैं।