शुकर्तीर्थ में पंजाबी धर्मशाला की कमेटी के पदाधिकारी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
समाज में बना रहे भाईचारा और शहीदों का रहे सम्मान
मुजफ्फरनगर। पचेंडा मार्ग के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद अभी थमा नहीं है। श्री गुरु सिंह सभा ने दावा किया है कि मार्ग का नामकरण 12 फरवरी 1970 को हुआ था। पालिका में इसका प्रस्ताव भी है। इसके बाद भी हम इस प्रकरण का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं। शहीदों का सम्मान भी करते हैं, समाज में भाईचारा कायम रहना चाहिए।
गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बराड ने गांधी कॉलोनी के गुरुद्वारा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि श्री गुरुनानक देव के 500 वें साला प्रकाश पर्व पर 12 फरवरी 1970 को नगर पालिका ने इस मार्ग का नाम गुुरु नानक मार्ग स्वीकृत किया था। गुरु गोविंद सिंह स्कूल के पास इसका शिलापट भी लगाया गया। इस वर्ष बैशाखी पर पुराने शिलापट के स्थान पर राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल से नया शिलापट लगवाया गया। इस प्रकरण में राज्यमंत्री का कोई मतलब नहीं है, उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। इस मामले को लेकर हम शहीद बचन सिंह के घर पर गए थे, लेकिन परिजनों ने कोई संतोष जनक उत्तर नहीं दिया। सिख धर्म शहीदों का बहुत ही मान सम्मान करता है। आपस में बैठकर इस मामले को निपटाना चाहती है। समाज में इससे अच्छा संदेश जाएगा। गुरु नानक देव सिखों के नहीं सभी धर्म के लोगों के गुरु थे। नाम बदलने का कार्य न तो हमने किया है और न ही हमारे द्वारा कोई नाम बदला गया। इस दौरान सचिव देवेंद्र नागपाल मौजूद रहे।