बुढ़ाना तहसील परिसर में रखा अंग्रेजों के जमाने का पत्थर दिखाते राजेश संगल।
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बुढ़ाना तहसील परिसर में तहसीलदार कार्यालय के सामने रखा तहसीलदार जेपी बिंदल के नाम का पत्थर चर्चा का विषय बना है। टूटा-फूटा यह पत्थर आजादी से पहले 1944 का है। पत्थर कहां से आया इस बात को लेकर वैश्य समाज के लोग आश्चर्यचकित हैं।
तहसील परिसर में तहसीलदार कार्यालय के पास एक टूटा-फूटा पत्थर रखा हुआ है। इस पत्थर पर जे पी बिंदल तहसीलदार 1944 लिखा है। महाराजा अग्रसेन सेवा समिति के जिलाध्यक्ष राजेश संगल, दिपांशु संगल, प्रमोद गर्ग व नीटू आदि ने बताया कि तहसील परिसर में आजादी से पहले का यह पत्थर कहां से आया। यहां पर कैसे पहुंचा। यह सोचने की बात है।
अंग्रेजों के जमाने में बिरादरी के तहसीलदार रहे जे पी बिंदल अपनेआप में एक हस्ती रहे होंगे। यह पत्थर कहां से आया यह उनके लिए सोच का विषय है। तहसील परिसर में रखा हुआ पत्थर चर्चा का विषय बना हुआ है।
कस्बे की पुरानी तहसील में टूटी-फूटी इमारत के पास तहसीलदार के नाम के इस पत्थर के पड़ा होने की सूचना कुछ समय पहले तत्कालीन तहसीलदार को मिली थी। उन्होंने पुरानी तहसील से इस पत्थर को उठवाकर यहां मंगवाया था। बुढ़ाना में पुरानी तहसील अंग्रेजों के जमाने की है। यह पत्थर तभी से नजारत कार्यालय के पास रखा हुआ है।
-तहसीलदार, मनोज कुमार सिंह