मुजफ्फरनगर। चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (गंगनहर की दाईं पटरी) का नवनिर्माण वन विभाग की आपत्तियों में उलझ गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद से 111.49 किमी लंबी पटरी का निर्माण 628.74 करोड़ रुपये की लागत से होना था। नवनिर्माण की जद में आने वाले करीब 45 हजार पेड़ों के कटान के लिए लोक निर्माण विभाग ने अनुमति का प्रस्ताव वन विभाग को भेजा। मगर, अभी तक इसका निस्तारण नहीं हो सका। कांवड़ यात्रा के दौरान आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए दाईं पटरी का निर्माण महत्वपूर्ण साबित हो सकता था। मगर, फाइल लखनऊ और मुजफ्फरनगर के बीच घूम रही है, जिससे पटरी के निर्माण में देरी होगी। इस कारण अगले महीने शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और आमजन को पटरी का लाभ नहीं मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी पहल
सीएम योगी आदित्यनाथ ने 28 मई 2018 को चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग की दाईं पटरी के निर्माण की घोषणा की थी। अगले साल यानि वर्ष 2019 में कैबिनेट की बैठक में मार्ग की लंबाई और बजट को हरी झंडी दे दी गई। दो साल में निर्माण कार्य पूरा होना था। मगर, करीब तीन साल की अवधि बीत गई, अभी तक निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हो सका है।
किस जिले में कितनी लागत और कितना निर्माण
जिला मार्ग की लंबाई लागत/लाख
मुजफ्फरनगर 56.840 किमी 31096.91
मेरठ 42.300 किमी 23615.37
गाजियाबाद 12.350 किमी 8161.98
इस तरह गुजरती हैं कांवड़ गंगनहर की दाईं पटरी
उत्तराखंड राज्य की सीमा से पुरकाजी-लक्सर मार्ग को पार कर तुगलकपुर, निरगाजनी, बेलड़ा, भोपा, जौली, काटका, जानसठ, चित्तौड़ा, सोंटा सराय और खतौली से कांवड़ गंगनहर की दाईं पटरी गुजरती हैं। मेरठ में सलावा क्षेत्र से होते हुए दौराला, भलसोना और मोहिउद्दीनपुर तक जाती हैं। गाजियाबाद में निवाड़ा पुल से सोनिया विहार तक पहुंचती हैं।
यह होना था दाईं पटरी के निर्माण का फायदा
गंगनहर की र्दाइं पटरी के निर्माण से दिल्ली-देहरादून हाईवे पर वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ-मुजफ्फरनगर के बीच हाईवे पर भारी वाहन बंद करने पड़ते हैं। पटरी के निर्माण से हाईवे बंद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
चार साल पहले बन चुकी हैं बाई पटरी
गंगनहर की सात मीटर चौड़ी बाइं पटरी का निर्माण 31 दिसंबर 2018 को पूरा हो चुका है। बाई की तरह दाई पटरी भी सात मीटर चौड़ी बनेगी। मुजफ्फरनगर में जमीन का अधिग्रहण भी होना है।
अभी तक नहीं मिली अनुमति
प्रस्ताव वन विभाग को भेजा जा चुका है, अभी तक पेड़ों के कटान की अनुमति नहीं मिली है। - अजय भास्कर, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड
आपत्तियों का कराया गया निस्तारण
जमीन को लेकर आपत्तियां लगाई गई थी, जिनका निस्तारण कराकर फाइल भेज दी गई है - कन्हैया पटेल, डीएफओ