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भूमि विकास बैंक के चुनाव में पहली बार भाजपा का कब्जा

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भूमि विकास बैंक के चुनाव में पहली बार भाजपा का कब्जा
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मुजफ्फरनगर। सहकारिता के चुनाव में अब तक के इतिहास में पहली बार भाजपा ने एकतरफा कब्जा किया है। ऐसा भी पहली बार हुआ कि प्रमुख विपक्षी दल के सभी प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त कर दिए गए। भूमि विकास बैंक के चुनाव में जनपद से पांच प्रतिनिधि चुने जाने थे, जिनमें चार निर्विरोध और एक चुनाव में विजयी होकर चुना गया।
जिले में सहकारिता के चुनावों पर पुराने दिग्गज नेताओं की शुरू से ही तैयारी होती है। भाजपा ने ऐसा पैंतरा चला कि इस बार सबकी तैयारी धरी रह गई। राजनीति का सबसे ज्यादा अखाड़ा चरथावल और बुढ़ाना के भूमि विकास बैंक को लेकर रहता है। बुढ़ाना में सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी के गुट का सभापति बनता रहा है। इस बार यहां से उन्होंने बिराल के पूर्व प्रधान दीपक सिंह को मैदान में उतारा था। इससे पहले दीपक सिंह के पिता नेपाल सिंह यहां के प्रतिनिधि थे। भाजपा ने अलीपुर अटेरना के विनोद कुमार सैनी को मैदान में उतारा। क्षेत्रीय विधायक उमेश मलिक ने विनोद को लेकर यहां अपनी प्रतिष्ठा बना ली थी। सपाइयों का आरोप है कि जानबूझकर दीपक सिंह का नामांकन निरस्त किया गया। उन्होंने इस संबंध में डीएम सेल्वा कुमारी जे को शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विनोद सैनी को यहां निर्वाचित घोषित किया गया। चरथावल में निवर्तमान प्रतिनिधि ठाकुर ओमवीर सिंह और भाजपा के जिला महामंत्री विजय सैनी ने नामांकन किया। ओमवीर सिंह को कांग्रेस के पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक और सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी चुनाव लड़वा रहे थे। यहां भी अंत समय में ओमवीर सिंह का पर्चा खारिज हो गया और विजय सैनी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। इस सीट को चरथावल विधायक और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री विजय कश्यप ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था। भूमि विकास बैंक के पुरकाजी और सदर सीट पर सपा के भीष्म सिंह गुर्जर और भाजपा के चौधरी ओम सिंह ने नामांकन किया था। आखिरी समय में यहां भी सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज हो गया। ओम सिंह निर्विरोध निर्वाचित हुए। यहां शहर विधायक और प्रदेश के राज्यमंत्री कपिलदेव ने चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा था। जानसठ में सपा की ओर से रटौर के नरेंद्र सिंह और भाजपा चौधरी ब्रिजेश आमने-सामने थे। ऐन वक्त पर सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज हो गया। यहां भी भाजपा के ब्रिजेश निर्विरोध जीत गए। इसी तरह खतौली में भी सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज कर दिया गया। भाजपा के ही दो प्रत्याशी आमने-सामने भिड़ गए, इनमें विनोद सैनी को क्षेत्रीय विधायक विक्रम सैनी ने और विजय मोतला को एक गुर्जर नेता ने मैदान में उतारा। चुनाव में विनोद सैनी 41 मतों से जीत गए। सहकारिता के चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ कि प्रमुख विपक्षी दल के सभी प्रत्याशियों के पर्चे खारिज हो गए। कुल मिलाकर भाजपा ने भूमि विकास बैंक के चुनाव में एकतरफा अपना कब्जा कर लिया है।
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राजपूत और गुर्जर चुनाव से बाहर
भूमि विकास बैंक के प्रतिनिधि के चुनाव में इस बार पांच प्रतिनिधियों में तीन सैनी और दो जाट जीते हैं। इससे पहले यहां दो राजपूत, दो गुर्जर और एक जाट प्रतिनिधि था। पहली बार राजपूत और गुर्जर इस चुनाव में बाहर हुए।
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चुनाव में लोकतंत्र की हत्या की गई
सपा के जिलाध्यक्ष और सहकारिता चुनाव से लंबे समय से जुड़े प्रमोद त्यागी का कहना है कि भूमि विकास बैंक के चुनाव में लोकतंत्र की खुलेआम हत्या की गई। निवर्तमान प्रतिनिधि तक के नामांकन खारिज कर दिए गए। सपा ने पांचों पदों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। पांचों के पर्चे योजनाबद्ध तरीके से खारिज कर दिए गए, क्योंकि आमने-सामने के चुनाव में भाजपा हमें नहीं हरा सकती थी। इस चुनाव में हमें कांग्रेस और रालोद का भी समर्थन था। यह चुनाव नहीं हुआ चुनाव का मजाक उड़ाया गया है।
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