सर्दी शुरू होने के साथ ही गंगा किनारे विदेशी पक्षियों की आमद शुरू हो जाती है। गंगा से सटे इलाके में बहुतायत से विभिन्न प्रजातियों के विदेशी पक्षी पहुंच जाते हैं और सर्दियां यहां बिताने के बाद लौट जाते हैं। विदेशी पक्षियों के आने की आहट से स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और वन विभाग चौकन्ना हो गया है। आशंका है कि सुदूर देश से आने वाले यह पक्षी अपने साथ बर्ड फ्लू जैसी बीमारी ला सकते हैं। इसलिए इन पर निगाह रखने के लिए टीमों को अलर्ट कर दिया गया है।
गंगा के किनारे शुक्रताल के आसपास प्रवासी पक्षी जाड़ों में अपना बसेरा बना लेते हैं और वसंत पंचमी यानि फरवरी-मार्च तक यहां से वापस अपने देश चले जाते हैं। इन पक्षियों पर निगाह रखने के लिए डीएम की अध्यक्षता में प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ ) और सीएमओ की टीम बनी हुई है। सर्दी शुरू होते ही यह टीम अलर्ट हो गई है।
सीवीओ डॉ हुकम सिंह ने बताया कि शुक्रताल के नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों, पशु अस्पतालों तथा वन कर्मचारियों को सक्रिय रहने के लिए कहा गया है। कहा गया है कि यदि कोई पक्षी बीमार या मरा हुआ मिले तो उसकी निगरानी करें। मरे हुए पक्षी को तुरंत दफना दें। ऐसा न हो कि वह बर्ड फ्लू से ग्रसित हो। उससे क्षेत्र में भी बीमारी फैल सकती है। पक्षियों से यह बीमारी मनुष्यों में फैल जाती है।
शिकारी भी हो जाते हैं सक्रिय
विदेशी पक्षियों के आते ही गंगा खादर इलाके में शिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं। वन विभाग को भी इस ओर सचेत किया गया है।
साइबेरिया से आते हैं पक्षी
कुछ पक्षी देश के ठंडे इलाकों से आते हैं, जबकि अधिकांश करीब दस हजार किलोमीटर का सफर तय करके साइबेरिया, उत्तरी एशिया, रूस, कजाकिस्तान से यहां आते हैं।
इन पक्षियों के कलवर से गूंजता है गंगा खादर
गंगा खादर इलाका सर्दियों में किंगफिशर, सुर्खाब, जलमुर्गी, पेलिकन, वुड, साइबेरियन क्रेन, ग्रेट फ्लेमिंगो, ब्लैक विंग्ट स्टिल्ट, कॉमन टील, रेड क्रेस्टेड पोचाड्र्स आदि प्रजाति के पक्षियों के कलरव से गूंजता है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. हुकम सिंह का कहना है कि बर्ड फ्लू की निगरानी के लिए टीम बनी है। इस टीम को सक्रिय कर दिया गया है।