भाकियू हरिद्वार से किसानों के हक के लिए आवाज करेगी बुलंद
मुजफ्फरनगर। भाकियू की किसान क्रांति यात्रा केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों का बिगुल फूंकेगी। हरिद्वार के टिकैत घाट से 23 सितंबर को प्रारंभ हो रही यात्रा दो अक्तूबर को दिल्ली के किसान घाट पहुंचेगी। पदयात्रा में देश के कई राज्यों के किसान अपने हकों की आवाज उठाएंगे। तैयारियां पूरी हो चुकी है, बस रणसिंघा बजने की देरी है।
केंद्र की मोदी सरकार के बीते चार साल में पहली बार भारतीय किसान यूनियन नए जोश और तेवर के साथ नजर आएगी। ऐसे कई प्रमुख मुद्दे हैं, जिनको लेकर भाकियू ने किसान क्रांति यात्रा का एलान किया है। भाकियू ने बीते दो माह से गांव-गांव में संपर्क किया और चौपालों पर पंचायतें हुई। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने खुद देशभर के किसानों से संपर्क साधे, ताकि क्रांति यात्रा को एतिहासिक बनाया जा सके।
इंडियन कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ फार्मर मूवमेंट और इंटरनेशनल संगठन एलवीसी के साथ भाकियू हरिद्वार के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत घाट से 23 सितंबर को किसान क्रांति यात्रा प्रारंभ करेगी, जिसमें देश के कई प्रांतों के किसान भाग लेंगे। उत्तराखंड से दिल्ली-दून नेशनल हाईवे पर दस दिन भाकियू को रणसिंघा बजेगा। हरी टोपी लगाए किसान अपने हकों की आवाज बुलंद करेंगे। यात्रा एक अक्तूबर को गाजियाबाद के हिंडन घाट स्थित हज हाउस पर पहुंचेगी। गांधी जयंती दो अक्तूबर को दिल्ली का कूच होगा, जहां दोपहर के बाद किसान घाट पर क्रांति यात्रा किसानों की पंचायत में बदल जाएगी।
भाकियू ने अपनी पूरी ब्रिगेड को क्रांति यात्रा की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंप रखी है। किस विधानसभा क्षेत्र से कितने किसान यात्रा में शामिल होंगे, उसके लिए संगठन के पदाधिकारियों से पूरी समीक्षा की जा चुकी है। भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा जब मेरठ पहुंचेगी, तब तक उसमें 50 हजार किसानों का काफिला होगा। किसान घाट पर लाखों किसान केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगो को मुद्दे उठाएंगे।
क्रांति यात्रा: किस दिन, कहां पड़ाव
23 सितंबर-रविवार, पतंजलि बहादराबाद
24 सितंबर-सोमवार, मंगलौर
25 सितंबर-मंगलवार, बरला इंटर कॉलेज
26 सितंबर- बुधवार, कूकड़ा मंडी मुजफ्फरनगर
27 सितंबर- बृहस्पतिवार, भैंसी गांव खतौली
28 सितंबर- शुक्रवार, दौराला, मेरठ
29 सितंबर- शनिवार, परतापुर, मेरठ
30 सितंबर- रविवार, मुरादनगर, गाजियाबाद
1 अक्तूबर- सोमवार, हिंडन घाट, गाजियाबाद
2 अक्तूबर- मंगलवार, किसान घाट, नई दिल्ली
केंद्र सरकार से ये है मांग
- डॉ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, ताकि किसानों को फल, सब्जी, दूध और फसलों का उचित व लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके।
- किसानों के सभी तरह के कर्ज एक ही समय सीमा में माफ किए जाए, क्योंकि किसानों पर 80 प्रतिशत कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है।
- बीते दस वर्ष में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक देश के तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की। पीड़ित किसानों के परिवार का पुनर्वास किया जाए तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
- पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव हो, ताकि प्रत्येक किसान को इकाई मान कर सभी फसलों में स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाए।
- किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित हो। लघु एवं सीमांत किसानों को 60 वर्ष से अधिक आयु में पांच हजार रुपये मासिक पेंशन मिले।
-- चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान को ब्याज सहित दिलाया जाए। सिंचाई हेतू नलकूप की बिजली नि:शुल्क मिले।
- राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा दिल्ली-एनसीआर में दस वर्ष से पुराने डीजल वाहनों पर रोक से किसानों को मुक्त किया जाए।
- सरकार मनरेगा को खेती से लिंक करें। खेती में प्रयुक्त वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए तथा कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखे।
- देश में पर्याप्त मात्रा में उत्पादित फसलों का आयात बंद किया जाए। एशियन मुक्त व्यापार समझौते की आड़ में ऐसे देशों का निर्यात बंद हो, जो उत्पादक नहीं है।
किसानों की समस्याओं को लेकर संसद में संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाए। एक माह तक की समीक्षा के बाद किसान हक में समाधान निर्णय हो।
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हर रोज बनेगी एक लाख रोटियां, प्रदूषण से मुक्त रखा जाएगा हाईवे
मुजफ्फरनगर। क्रांति यात्रा में शामिल किसानों के भोजन, पानी और विश्राम की भाकियू ने विस्तृत व्यवस्था की है। क्षेत्रवार गांव-गांव से भोजन तैयार होकर पड़ाव कैंप में पहुंचेगा। एक लाख रोटियां रोज सिकेंगी। ट्रैक्टरों से 50 टैंकर पानी किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। तीन दर्जन गैस की भट्ठियां निरंतर चलेगी। प्रदूषण मुक्त हाईवे रखने को किसान स्वयं के बर्तन लेकर आएंगे, जिनमें खाना परोसा जाएगा। पत्तल और थर्माकोल गिलास का प्रयोग वर्जित रहेगा। उधर, चरथावल ब्लाक यूनिट को 30 हजार किसानों के खाने का जिम्मा सौंपा गया है। ब्लाक अध्यक्ष विकास शर्मा ने बताया कि गांव-गांव से किसानों ने राशन एकत्र किया है। 15 बड़े ट्रैक्टर ट्राली में गद्दे बिस्तर लगा कर यात्रा में किसान शामिल होंगे। 20 छोटी ट्रैक्टर ट्रालियां भी रहेगी।