गौड़ीय मठ के भक्ति भूषण की जमानत अर्जी खारिज
मुजफ्फरनगर। त्रिपुरा और मिजोरम के दस बच्चों के शारीरिक और मानसिक शोषण के मामले में जेल में बंद गौड़ीय मठ के संचालक भक्ति भूषण गोविंद महाराज की अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है। पॉक्सो की विशेष अदालत में जमानत अर्जी दी गई थी।
शुकतीर्थ के गौड़ीय मठ से एक माह पूर्व चाइल्ड लाइन की टीम ने बच्चों को मुक्त कराया था। मठ में बच्चों का यौन शोषण करने के मामले में जेल में बंद आरोपी मठ के संचालक भक्ति भूषण महाराज के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। विशेष अदालत (पॉक्सो) के जज संजीव तिवारी ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है। दोनों पक्षों के तर्क वितर्क सुनने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी रद्द की गई। इससे पहले अभियोजन की ओर से विशेष अधिवक्ता पॉक्सो दिनेश कुमार शर्मा ने जमानत का कड़ा विरोध किया तथा बताया कि आरोपी पर संगीन आरोप हैं। ऐसी स्थिति में आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं है। दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि दोनों पक्षो को सुनने के बाद अदालत ने भक्ति भूषण गोविंद की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
नौ जुलाई को शुकतीर्थ के गौड़ीय मठ से दस बच्चों को मुक्त कराके उन का डॉक्टरी परीक्षण कराया गया था। इसमें बच्चों के साथ यौन शोषण का मामला प्रकाश में आने पर पुलिस ने कई संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर मठ के संचालक स्वामी भक्ति भूषण गोविंद महाराज व उसके शिष्य कृष्ण मोहन दास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सभी दस बालकों के धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए गए थे, जिसमें पीड़ितों ने अभियोजन की कहानी का समर्थन किया था। सभी बालक बाल कल्याण बोर्ड के संरक्षण में है। गौरतलब है कि दूसरे आरोपी कृष्ण मोहन दास की जमानत अर्जी बचाव पक्ष ने वापस ले ली है।